भीलवाड़ा में आचार्य पुलकसागर ने कहा- जो दोनों हाथ से लुटाता है, वही सब कुछ पाता है
भीलवाड़ा में आचार्य पुलकसागर महाराज ने उत्तम त्याग धर्म की आराधना में दान, त्याग और जैन जीवनशैली का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया।

तस्वीर में दिख रहे लोग भीलवाड़ा में जैन मंदिर में भगवान का अभिषेक कर रहे हैं।
जो दोनों हाथ से लुटाता है, वहीं सब कुछ पाता है” और “पुण्यवानी से प्राप्त होता जैन धर्म, जिंदगी ऐसी बनाओ कि देखकर कह सके ये जैन है”—इन संदेशों के साथ राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में बुधवार को दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की आराधना की गई। भगवान के अभिषेक और भक्ति के दौरान श्रावक-श्राविकाएं झूम उठे और जमकर नाचते-गाते रहे।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे आचार्य पुलकसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में दशलक्षण महापर्व की आराधना चल रही है। बुधवार को इसके आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म का पूजन एवं आराधना की गई।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने उत्तम त्याग धर्म का संदेश देते हुए कहा कि अर्जन के साथ विसर्जन होना जरूरी है। केवल अर्जन करते रहने पर जिंदगी डूब जाती है। जो जोड़ते ही जाते हैं और छोड़ते नहीं हैं, उनका पतन होना निश्चित है। वहीं, जो जोड़ना और छोड़ना दोनों जानते हैं, उनका जीवन आनंदमय रहता है। त्याग की भावना ही जिंदगी का आधार हुआ करती है। हमारी सोच जोड़ो और छोड़ो वाली होनी चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि धन की तीन दशा दान, भोग और नाश बताई गई है। साधु दान की प्रेरणा देते हैं, क्योंकि दान ही मुक्ति का आधार है। धन जोड़ते ही जाने और दान नहीं करने पर वह भोग या नाश में जाएगा। शुद्ध भावों से दान देने वाले के लिए स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं। दान कभी जबरदस्ती नहीं होता, इसलिए कभी भी दान देकर पछतावा नहीं करना चाहिए। दान हमेशा खुश मन से देने पर वह अवश्य फलता है। उन्होंने कहा कि दान हमेशा सुपात्र एवं जरूरतमंद को देना चाहिए। कुपात्र को दिया जाने वाला धन व्यर्थ हो जाता है।
जिनेन्द्र भगवान ने हमें इस बात का गौरव दिया है कि जैन स्वाभिमानी होता है और कभी भीख नहीं मांगता। पैसा भोग में नहीं, योग और दान में लगाना चाहिए।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि संतान के लिए पैसा जोड़ना छोड़ दो और जो पैसा पास में है, उसका सदुपयोग करो। कभी कल की चिंता मत करो, क्योंकि जो दान देता है उसके कल की चिंता परमात्मा करते हैं और कई गुना वापस प्राप्त होता है। उन्होंने कहा, “सब कुछ वहीं पाता है जो दोनों हाथ से लुटाता है।” फकीरी जैसा जीवन जीने का आनंद लेने और कभी परछाई के पीछे नहीं दौड़ने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया से मुंह मोड़ लो, दुनिया आपके पीछे दौड़ेगी।
उन्होंने कहा कि हर कोई संत का नाम लेता है, पर संत जिसका नाम लेते हैं, उसकी जिंदगी और भक्ति सार्थक हो जाती है। हमारी नजर में नहीं, हम भगवान की नजर में आ जाएं तो जिंदगी सार्थक हो जाएगी।
आचार्यश्री ने कहा कि हम जैन हैं और जिनशासन मिला है। अपनी जाति और धर्म पर गर्व करें और बच्चों को समझाएं कि बड़े पुण्य से जैन धर्म प्राप्त होता है। बच्चों को दूसरी जातियों में शादी नहीं करने के लिए प्रेरणा देने की बात भी कही। उन्होंने सप्त व्यसनों का त्याग करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमारा घर ऐसा होना चाहिए कि उसे देखकर अजैन भी कह सके कि ये जैन का घर है। हमने अपना चरित्र और प्रतिष्ठा खोई है। धर्म की मर्यादा स्थापित करनी होगी।
आचार्यश्री ने कहा कि बच्चों के रात्रि में विवाह नहीं करें और जिंदगी में खुश रहना है तो रिश्ते हमेशा बराबरी में करें।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पर्युषण में आयोजित पाप नाशनम् शिविर में शामिल सैकड़ों श्रद्धालु प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक परमात्मा की पूजा-अर्चना और भक्ति में समर्पित हैं। पर्युषण के आठवें दिन चक्रवती बनकर भगवान का अभिषेक करने का सौभाग्य संजय, मधु अग्रवाल ने प्राप्त किया। शांतिधारा का सौभाग्य सुनील सेठी परिवार ने प्राप्त किया। सांयकालीन महाआरती का सौभाग्य जूनियर जैन महिला जागृति पुलकसागर बालिका मंडल ने प्राप्त किया।
दशलक्षण महापर्व के नवें दिन गुरुवार को उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना होगी। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा के अनुसार पाप नाशनम शिविर एवं पर्युषण की दस दिवसीय आराधना अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर शुक्रवार को पूर्ण होगी।
इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5.30 से 6.30 बजे तक योग, ध्यान एवं आचार्य भक्ति हो रही है। सुबह 7 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा व दशलक्षण धर्म पूजन हो रहा है। सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन हो रहे हैं। शाम 4 बजे से धार्मिक कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। शाम 5.30 से 6.30 बजे तक प्रतिक्रमण एवं ध्यान साधना का आयोजन होता है। शाम को 6.30 बजे आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से परमात्मा की भक्ति हो रही है।

Anshul Toshniwal, Bhilwara
नाम: अंशुल तोषनीवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): सभी प्रकार के समाचार (General Reporting)
अनुभव: 6 माह
परिचय
अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।
