भीलवाड़ा में चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत आचार्य पुलकसागर महाराज ने परिवार में मधुर संबंध बनाए रखने, क्रोध और कषाय से बचने तथा कर्मों के उदय के समय संयम रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया घूम लेने के बाद भी घर में मिलने वाली खुशी कहीं और नहीं मिल सकती। परिवार के सदस्यों के साथ कषाय करने से रिश्तों में ऐसी दूरी पैदा हो सकती है, जिसे क्षमा मांगने के बाद भी मिटाना मुश्किल हो जाता है। जीवन में खुशी पाने के लिए अपनी जीवनशैली में बदलाव करना आवश्यक है।

श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने बुधवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला ‘जीवन जीने की कला’ के आठवें दिन मंगल दिव्य देशना दी। इस दौरान उन्होंने परिवार, कर्म, संयम और कषाय से मुक्ति के महत्व पर विस्तार से विचार रखे।

आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में परिवार के सदस्यों के साथ कभी कषाय नहीं करना चाहिए, क्योंकि उन्हीं के साथ पूरी जिंदगी बितानी है। हमारा एक छोटा-सा कदम रिश्तों को मजबूत भी कर सकता है और उन्हें बिगाड़ भी सकता है। परिवार के सदस्यों का स्थान कोई दूसरा नहीं ले सकता। ऐसे में उन्हें उचित स्थान और सम्मान देने से घर स्वर्ग बन सकता है तथा कषाय बंध से भी बचा जा सकता है। परिवार में सदस्यों के स्थान बदलने से रिश्ते खत्म हो जाते हैं। जीवन में माता-पिता और गुरु का स्थान भी कोई दूसरा नहीं ले सकता।

कर्मों के संबंध में आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि मनुष्य अपने कर्मों के अधीन है, लेकिन मनुष्य जन्म कर्मों का फल भोगने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने के लिए मिला है। कर्मों का फल भोगने के लिए नरक, तिर्यंच और देव गति हैं, जबकि मनुष्य गति ही ऐसी है, जिसमें कर्मों को सुधारा या क्षय किया जा सकता है। मनुष्य में कर्म बांधने, भोगने और उनका नाश करने की क्षमता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य का अधिकांश समय कर्म बांधने या उनका फल भोगने में निकल रहा है, जबकि कर्मों को रोकने के प्रयास नहीं हो रहे हैं। कर्मों को रोकने के लिए संयम का भाव रखना जरूरी है। कर्मों के उदय में आने पर क्रोध करने के बजाय वीतरागी बनना चाहिए। राग और द्वेष के भाव अपनाने से कर्मों का बोझ बढ़ जाता है। आचार्यश्री ने कहा कि सभी सुख भोग लेने से पुण्य का खजाना खाली हो सकता है। इसलिए पुण्य को भोगने के बजाय उसे बचाने का प्रयास करना चाहिए।

आचार्य पुलकसागर महाराज ने क्रोध, मान, माया और लोभ से बचने की सीख देते हुए कहा कि कषाय को जितना अधिक समय दिया जाएगा, उसकी पकड़ उतनी ही मजबूत होती जाएगी। कषायों को पकड़े रहने वाला व्यक्ति दुख पाता है, जबकि उन्हें छोड़ने वाला सुख प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि क्रोध को छह माह तक बनाए रखने पर वह अनंतानुबंधी बनकर अनंत जन्मों तक दर्द दे सकता है। इसलिए अपने भीतर कषायों को जमा करने के बजाय उन्हें लगातार डिलीट करते रहना चाहिए। कषाय जितना लंबा होगा, उससे मिलने वाला दर्द भी उतना ही गहरा होगा।

श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि प्रवचन की शुरुआत में पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य पुण्यार्जक परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।

चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह और सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि 30 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 8.45 से 10 बजे तक आचार्यश्री के मुखारबिंद से दिव्य देशना होगी। इसके साथ ही प्रतिदिन शाम 6.30 से 7.30 बजे तक आनंद यात्रा (प्रश्न मंच) का आयोजन किया जा रहा है। इसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं। आचार्यश्री की देशना में परिवार के प्रति सम्मान, कर्मों के प्रति सजगता और कषायों पर नियंत्रण को सुखी जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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