इन्द्रियों के दास संसारी, जिनेन्द्र की आज्ञा मानने वाले मुनिराज: पुलकसागर
आचार्य पुलकसागर महाराज ने इन्द्रियों की साधना, समताभाव और जिनेन्द्र की आज्ञा को जीवन का आधार बताते हुए श्रद्धालुओं को श्रद्धा बनाए रखने का संदेश दिया।

तस्वीर में कमलचंद, निवेदिता और चिंतन बड़जात्या परिवार मंच पर खड़े नजर आ रहा है।
इन्द्रियों के विषय भोग और साधना के बीच अंतर बताते हुए राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने कहा कि संसारी इन्द्रियों का पोषण करते हैं, जबकि साधु इन्द्रियों की साधना करते हैं। जो जिनेन्द्र भगवान की आज्ञा मानकर उसी के अनुरूप जीवन जीते हैं, वे मुनिराज होते हैं और जो इन्द्रियों के दास बन जाते हैं, वे संसारी होते हैं। आचार्य पुलकसागर महाराज ने ये विचार श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार किए जा रहे चातुर्मास के दौरान गुरुवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जीव की पहचान उसके शरीर से होती है। इन्द्रियां अपना-अपना कार्य करती हैं और एक-दूसरे के कार्य में दखल नहीं करतीं, इसलिए उनमें झगड़े नहीं होते। संसारी इन्द्रियों का पोषण करते हैं और साधु इन्द्रियों की साधना करते हैं। संत मुनिराज जिनेन्द्र भगवान की आज्ञा से अधिक कुछ नहीं सोचते, जबकि संसारी का लक्ष्य होता है कि किसी भी तरह अपना काम बन जाए।
उन्होंने कहा कि साधु जिनेन्द्र भगवान के लिए दीक्षा लेता है और उनकी आज्ञा में ही चलता है। साधु का लक्ष्य होता है कि जीवन छूट जाए, लेकिन जिनेन्द्र भगवान की आज्ञा नहीं छूटनी चाहिए। वह भगवान की आज्ञा के खिलाफ नहीं जा सकता। वह अपनी इन्द्रियों को विषय भोग में नहीं, बल्कि धर्म ध्यान और साधना में लगाता है।
आचार्यश्री ने कहा कि साधु समताभाव का धारक होता है। वह किसी भी परिस्थिति में खेद-खिन्न नहीं होता और उसकी मानसिकता अडिग होती है। जो किसी भी परिस्थिति में अपने मन को विचलित नहीं करता, वही समताभाव धारण कर सकता है। ऐसे समताभाव वाले मानसिक संतुलन नहीं खोते हैं। उन्होंने कहा कि जिनकी सहन करने की शक्ति उत्तम होती है, वे शुद्धोपयोगी होते हैं और जो उससे कुछ कम सहनशीलता वाले होते हैं, वे शुभोपयोगी होते हैं। हम शुद्धोपयोगी जैसी सहनशक्ति नहीं होने से शुभोपयोगी संत हैं।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि शुद्धोपयोगी मुनि आत्मा का ध्यान करते हैं और शुभोपयोगी मुनि धर्म ध्यान करते हैं। धर्म ध्यान और आत्म ध्यान अलग-अलग होते हैं, जिन्हें एक नहीं माना जा सकता। जो संसारी होता है, वह अशुभोपयोगी होता है और आत्म रौद्र ध्यान करता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में सब कुछ कर लेना, लेकिन अपने देव, गुरु और शास्त्र पर श्रद्धा कमजोर नहीं करना है। श्रद्धा शरीर से नहीं, भाव से जुड़ी होती है। किसी के बहकावे में आकर अपनी श्रद्धा को कभी खराब नहीं होने देना चाहिए। शरीर का लुटेरा शरीर लूटता है और धन का लुटेरा धन लूटता है, लेकिन श्रद्धा का लुटेरा सब कुछ लूट लेता है। ऐसे लुटेरों से बचकर रहना ही सम्यक दर्शन है।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में पर्युषण (दशलक्षण) पर्व की साधना 16 से 25 सितम्बर तक सूर्यमहल में होगी। इस अवधि में दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर के आयोजन को लेकर उत्साह का माहौल है। इस शिविर के लिए अब तक सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं पंजीयन करा चुके हैं।
प्रवचन के शुरू में दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य कमलचंद, निवेदिता और चिंतन बड़जात्या परिवार ने प्राप्त किया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने बताया कि प्रतिदिन चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.30 से 10 बजे तक सूर्यमहल में हो रहे हैं। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
