दोस्ती कमाई तो दुनिया में सब कुछ कमा लिया: आचार्य पुलकसागर ने बेटियों के संस्कार और संगति पर चेताया
आचार्य पुलकसागर महाराज ने दोस्ती, बेटियों के संस्कार और संगति के महत्व पर संदेश दिया। चित्रकूटधाम में हजारों श्रद्धालु पहुंचे।

राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जीवन में रिश्तेदारी से भी अनमोल दोस्ती होती है। रिश्ते खून से बनते हैं, जबकि दोस्ती भावनाओं के मेल से बनती है। संकट में साथ न छोड़ने वाला ही सच्चा दोस्त होता है। उन्होंने कहा कि जिसने दौलत या शोहरत कमाई, उसने कुछ नहीं कमाया, लेकिन जिसने सच्ची दोस्ती कमाई, उसने दुनिया में सब कुछ कमा लिया। अच्छा और सच्चा दोस्त जीवन को स्वर्ग बना देता है।
भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे आचार्य पुलकसागर महाराज ने रविवार को श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में प्रवचन के दौरान दोस्ती के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दोस्त उन परिन्दों की तरह नहीं होते, जो तालाब सूखने पर उड़ जाएं, बल्कि उन मछलियों की तरह होते हैं, जो तालाब सूखने पर वहीं प्राण त्याग देती हैं।
आचार्यश्री ने कहा कि पत्नी खराब हो तो 60 प्रतिशत जीवन खराब हो जाता है, दोस्त अच्छा हो तो 80 प्रतिशत जीवन बच जाता है, लेकिन गुरु अच्छा हो तो 100 प्रतिशत जीवन बच जाता है। जीवनसाथी गलत मिल गया तो एक भव बिगड़ जाएगा, लेकिन दोस्तों की संगत गलत हो गई तो भव-भव बिगड़ जाएंगे। अच्छे दोस्त मिल जाएं तो जीवन सुधर जाता है और मुसीबत में रिश्तेदारी से ज्यादा दोस्त काम आते हैं।
उन्होंने कहा कि जिंदगी खत्म हो जाएगी, लेकिन अच्छा और वफादार दोस्त नहीं मिलेगा, इसलिए स्वयं वफादार बन जाएं। हम बेईमानी करते हैं और वफादार दोस्त तलाशते हैं। इसके बजाय अच्छा दोस्त बनने का प्रयास करना चाहिए। आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि दोस्त किसी को अपने अनुसार नहीं चलाते, बल्कि वह जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार करते हैं। कोई किसी को बदल नहीं सकता, इसलिए जैसे हैं, उसी में आनंदित रहें। जैसे आप होंगे, वैसे ही दोस्त मिलेंगे।
बेटियों के संस्कार और उनकी संगति पर बोलते हुए आचार्य पुलकसागर महाराज ने बेटियों द्वारा घर से भागकर विधर्मियों से शादी करने के बढ़ते मामलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बेटियों को संस्कारवान बनाने के लिए माता-पिता और समाज सभी को जागृत होना पड़ेगा। बेटियों को संस्कारवान नहीं बना पाए तो उनकी और परिवारजनों की जिंदगी नरक समान बन जाएगी। जो मां बेटियों को संस्कार नहीं सिखा पाएगी, वह एक दिन विधर्मी की बन जाएगी।
उन्होंने कहा कि बेटियां हर किसी से दोस्ती न करें। पढ़ाई करना उनका काम है और जीवनसाथी ढूंढना माता-पिता का काम है। ज्यादा भरोसा किया तो धोखा खाएंगे। उन्होंने अफसोस जताया कि माता-पिता के कहने पर मर्यादा वाले वस्त्र नहीं पहनने वाली बेटियों को किसी की मोहब्बत में आकर मुंह ढकने वाले कपड़े पहनने में शर्म नहीं आती। सनातनियों और जैनियों को जागरूक होकर अपना धर्म बचाने की जरूरत है। किसी को दोष नहीं देना है, बल्कि स्वयं को सुधारना और सचेत होना पड़ेगा।
आचार्यश्री ने कहा कि वे बेटियां सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें भारत में और वह भी जिनशासन में जन्म मिला। उन्हें इस पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए और अन्तर्जातीय विवाह से बचना चाहिए। विवाह के लिए पुरखों ने जो परम्परा बनाई, उसका पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कागजों में नहीं, जिंदगी में अच्छे नम्बर लाएं, जिंदगी महान बन जाएगी।
उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि प्यार और मोहब्बत में आकर भागने से पहले अंजाम सोच लें। बाद में यह नहीं कहना पड़े कि काश बात मान ली होती तो जिंदगी आज नरक नहीं बनती। तुच्छ सुख के लिए अपने परिवार पर कालिख न पोतें। याद रखें, जो अपने माता-पिता का नहीं हो सका, वह किसी का नहीं हो सकेगा।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि हमें दोस्त अच्छे लगते हैं, लेकिन रिश्ते बोझ लगने लगते हैं। ऐसा न हो, इसके लिए जरूरी है कि रिश्तों को दोस्ती में बदलना सीखें। बेटा जब कंधे के बराबर आ जाए तो पिता उससे दोस्त जैसा व्यवहार करने लगे। सास-बहू एक-दूसरे के साथ मित्रता वाला संबंध रखें। पति-पत्नी दोस्ती का रिश्ता बना लें तो जिंदगी का आनंद आ जाएगा। बच्चों के साथ दोस्ती का रिश्ता बना लेंगे तो उनके मन की बात भी समझ सकेंगे।
उन्होंने कहा कि परिवार में रिश्ते बचे हैं, लेकिन उनमें प्रेम नहीं बचा है। दोस्ती में स्वतंत्रता और रिश्ते में पराधीनता होती है। दोस्ती में सुकून होता है, जबकि रिश्ते निभाने पड़ते हैं। रिश्तेदारी में जाति और धर्म देखा जाता है, जबकि दोस्ती की कोई सीमा नहीं होती।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि बेटी के लिए वर देखने जाएं तो परिवार, संपत्ति और रिश्तेदार सब बाद में देखें, सबसे पहले यह देखें कि उसके दोस्त कैसे हैं। बच्चे वैसे नहीं होते जैसे उनके माता-पिता होते हैं, बच्चे वैसे हो जाते हैं जैसे उनके दोस्त और संगत हो जाती है। दोस्ती ही भविष्य तय करती है। बच्चे माता-पिता से मन की बात छिपाते हैं, लेकिन दोस्त हमराज हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि अच्छी पत्नी लाने में परिवार का हाथ होता है, अच्छी संतान कुदरत की देन होती है, लेकिन दोस्त का चयन हम स्वयं करते हैं और उसमें किसी अन्य का हाथ नहीं होता। जब तक दोस्ती का रिश्ता है, तभी तक दुनिया जीने लायक है। जिस दिन यह रिश्ता भी नहीं होगा, उस दिन संसार उजड़ जाएगा।
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य जयकुमार, निर्मल सौरभ अक्षत विधान पाटनी परिवार ने प्राप्त किया। भोपाल से पधारे संघपति प्रदीप मामा ने भी गुरुदेव का अभिनंदन किया। अजमेर, चित्तौड़गढ़ आदि स्थानों से भी समाजजन गुरु दर्शन और ज्ञान गंगा महोत्सव का लाभ पाने के लिए पहुंचे।
सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह और सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया। जैन महिला मण्डल चन्द्रशेखर आजादनगर ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
रविवार को अवकाश का दिन होने से भीलवाड़ा शहर और आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

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