भीलवाड़ा। जयपुर के शाहपुरा निवासी युवक अभिषेक सेन की निर्मम हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है, जिससे भीलवाड़ा के सेन समाज में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। शनिवार को भीलवाड़ा के समस्त सेन समाज ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें दोषियों को फांसी की सजा देने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की पुरजोर व कड़े शब्दों में मांग की गई है।

समाज द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में इस पूरी घटना को सुनियोजित हत्याकांड बताते हुए आरोप लगाया गया है कि शाहपुरा निवासी अभिषेक सेन पुत्र शांतिलाल सेन, जो जयपुर में सैलून का व्यवसाय कर अपना जीवनयापन कर रहे थे, उनकी 4 अप्रैल 2026 को असामाजिक तत्वों द्वारा बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। समाज का स्पष्ट आरोप है कि हत्यारों ने साक्ष्य मिटाने और कानून को गुमराह करने के उद्देश्य से अभिषेक के शव को फांसी पर लटका दिया, ताकि इस जघन्य अपराध को आत्महत्या का रूप दिया जा सके।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए गहरा रोष व्यक्त किया। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि जयपुर के झोटवाड़ा थाने में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक पुलिस ने न तो उचित रिपोर्ट तैयार की है और न ही मामले में कोई ठोस कार्रवाई अमल में लाई गई है। पुलिस की इस कथित ढिलाई से समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। इसी के दृष्टिगत समाज ने मांग की है कि मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच तत्काल सीबीआई (CBI) या उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) से करवाई जाए।

न्याय की गुहार लगाते हुए सेन समाज ने प्रशासन के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने और उन्हें मृत्युदंड की सजा दिलाने की बात प्रमुखता से कही गई है। इसके अतिरिक्त, पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा देने, मृतक की पत्नी को उनकी योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी प्रदान करने तथा बच्चों की शिक्षा और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी सरकार द्वारा वहन करने की मांग की गई है। समाज ने यह भी मांग उठाई है कि सैलून और स्पा पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का सरकार द्वारा अनिवार्य पंजीकरण किया जाए और रिपोर्ट दर्ज करने में कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध सख्त विभागीय जांच सुनिश्चित हो।

न्याय के लिए लामबंद हुए सेन समाज ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में 7 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो समस्त हिंदू समाज द्वारा अनिश्चितकालीन धरना और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। समाज ने दो टूक कहा है कि भविष्य में उत्पन्न होने वाली किसी भी विपरीत परिस्थिति और आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।

Pratahkal Newsroom

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