बोहेड़ा में उमड़ा आस्था का सैलाब: "राम नाम ही जीवन की नैया को पार लगाने वाला एकमात्र आधार" — संत दिग्विजय राम
बोहेड़ा में काबरा परिवार द्वारा आयोजित 'नानी बाई का मायरा' कथा के दूसरे दिन संत दिग्विजय राम ने पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए राम नाम की महिमा का गुणगान किया। नरसी मेहता की भक्ति और जीवन जीने की कला पर आधारित इस प्रेरक प्रवचन और "काया रो गुलाबी रंग" भजन ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। जानिए कैसे आस्था और विश्वास से बदल सकता है जीवन।

बोहेड़ा (चित्तौड़गढ़)। "राम नाम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो मनुष्य की जीवन रूपी नैया को मझधार से पार लगाती है। हमारी प्राचीन परंपराओं में राम-राम कहना संस्कार था, लेकिन पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण ने हमारी गौरवशाली संस्कृति को गहरी क्षति पहुँचाई है।" यह ओजस्वी विचार संत दिग्विजय राम जी ने बोहेड़ा में आयोजित तीन दिवसीय 'नानी बाई का मायरा' कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से व्यक्त किए। काबरा परिवार द्वारा आयोजित इस भव्य आध्यात्मिक अनुष्ठान में उमड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए संत ने जीवन जीने की कला और भक्ति की शक्ति पर प्रकाश डाला।
कथा के रसाअमृत पान के दौरान संत ने वर्तमान समाज की विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज लोग आलीशान बंगले तो बनाते हैं, लेकिन जिस ईश्वर की कृपा से सब कुछ मिला, उनके लिए घर में स्थान देना भूल जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यक्ति जैसा अन्न ग्रहण करता है, वैसी ही उसकी वृत्ति और मन हो जाता है। एक सच्चे भक्त के घर की पहचान उसके द्वार पर अंकित धर्म चिह्नों से होती है। उन्होंने भक्तों को प्रेरित किया कि घर से निकलते समय ईश्वर को प्रणाम करने की आदत डालें, जिससे बड़ी से बड़ी विपदा भी टल जाती है।
भक्त राज नरसी मेहता के प्रसंग का वर्णन करते हुए संत दिग्विजय राम ने भावुक कर देने वाला चित्रण किया। उन्होंने बताया कि जब नरसी मेहता अपनी पुत्री नानी बाई का मायरा भरने के लिए अपने भाई-बंधुओं से सहायता मांगते हैं, तो सब मुंह मोड़ लेते हैं। समाज के तिरस्कार के बावजूद, अटूट विश्वास के साथ नरसी अपनी टूटी-फूटी गाड़ी और बीमार बैलों को लेकर संतों की टोली के साथ निकल पड़ते हैं। रास्ते में विपदा आने पर भी उनका भरोसा केवल अपने आराध्य पर रहता है। इसी प्रसंग के दौरान जब संत ने "थारी काया रो गुलाबी रंग उड़ जासी..." भजन गाया, तो पूरा पांडाल भावविभोर होकर झूम उठा।
संत ने जीवन के कड़वे सत्य को साझा करते हुए कहा कि शब्दों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि शब्द ही व्यक्ति को किसी के दिल में उतार देते हैं और शब्द ही दिल से उतार भी देते हैं। उन्होंने जीवन का मूल मंत्र देते हुए कहा कि मनुष्य को दो बातें हमेशा याद रखनी चाहिए—ईश्वर और मृत्यु, जबकि दो बातें हमेशा भूल जानी चाहिए—किसी पर किया गया उपकार और किसी के द्वारा किया गया अपकार। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि शरीर की अस्थियां बिखरने से पूर्व हृदय में आस्था जागृत हो जानी चाहिए, यही जीवन की सार्थकता है।
कथा के दूसरे दिन का समापन भगवान चारभुजा नाथ की भव्य आरती के साथ हुआ, जिसके पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में काबरा परिवार सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने संत के वचनों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
