भीलवाड़ा के प्रेम प्रकाश आश्रम में मकर संक्रांति पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब: राहगीरों के लिए सजा 'अन्न क्षेत्र', भजनों की गूंज से भक्तिमय हुआ माहौल
भीलवाड़ा के श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में मकर संक्रांति पर भव्य सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। किशोर गुरनानी और सेवा मंडली के सहयोग से राहगीरों को पूड़ी-सब्जी व पकौड़ी का प्रसाद वितरित कर अन्न क्षेत्र और जल सेवा की गई। भजन-कीर्तन और सत्संग के बीच मकर संक्रांति का यह पर्व भक्ति और सेवा के अनूठे संगम के रूप में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने भाग लिया।

भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर दान-पुण्य और सेवा की एक अनुपम अविरल धारा प्रवाहित हुई। स्मृति वन के सामने स्थित श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में आस्था और सेवा का संगम देखने को मिला, जहाँ मानवता की सेवा को ही सर्वोपरि धर्म माना गया। सूर्य के उत्तरायण होने के इस शुभ अवसर पर आश्रम के द्वार राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए, जहाँ भक्ति के साथ-साथ सेवा का अनूठा अनुष्ठान संपन्न हुआ।
उत्सव का आगाज़ अलसुबह आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ हुआ। श्री प्रेम प्रकाश सेवा मंडली के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में राहगीरों और जरूरतमंदों के लिए विशाल 'अन्न क्षेत्र' का आयोजन किया गया। सेवा मंडली के समर्पित सदस्य किशोर गुरनानी ने जानकारी देते हुए बताया कि आश्रम की यह गौरवशाली परंपरा रही है कि हर वर्ष की भांति इस साल भी मकर संक्रांति पर सेवा के प्रकल्प चलाए गए। आश्रम के बाहर से गुजरने वाले प्रत्येक राहगीर को बड़े ही आदर और सत्कार के साथ पूड़ी-सब्जी और गरमा-गरम पकौड़ी का प्रसाद वितरित किया गया। अन्न सेवा के साथ-साथ शीतल जल सेवा का भी प्रबंध किया गया, जिसने मकर संक्रांति के दान-पुण्य के महत्व को धरातल पर चरितार्थ किया।
आयोजन की गरिमा को बढ़ाते हुए आश्रम परिसर सत्संग और भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनियों से गुंजायमान रहा। जहाँ एक ओर बाहर सेवा का कार्य चल रहा था, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालु प्रभु भक्ति के भजनों में लीन नजर आए। भजनों की स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को दिव्य और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। इस पुनीत कार्य में प्रेम प्रकाश सेवा मंडली और प्रेम प्रकाश महिला मंडली के सभी प्रेमियों सहित समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई।
धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक सरोकारों को जोड़ता यह आयोजन केवल एक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि समाज में समरसता और परोपकार का संदेश देने का एक सशक्त माध्यम बना। सामूहिक सहयोग और निस्वार्थ भाव से किए गए इस आयोजन ने भीलवाड़ा की सांस्कृतिक और सेवाभावी विरासत को और अधिक सुदृढ़ किया है। अंत में सभी ने इस सेवा कार्य के सफल आयोजन पर हर्ष व्यक्त किया और आगामी वर्षों में भी इसी उत्साह के साथ जनसेवा का संकल्प दोहराया।

Pratahkal Bureau
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