भीलवाड़ा में श्री पंचमुखी दरबार सेवा समिति की अनूठी पहल: नेत्रहीन एवं मूक-बधिर बच्चों के जीवन में घुली शिक्षा की मिठास
भीलवाड़ा में मकर संक्रांति के पर्व पर श्री पंचमुखी दरबार सेवा समिति ने "एक किट, एक मुस्कान" अभियान के तहत नेत्रहीन एवं मूक-बधिर बच्चों को निःशुल्क शिक्षण सामग्री वितरित कर शिक्षा की सौगात दी। अध्यक्ष लक्ष्मण दास त्यागी और संतों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य वंचित बच्चों को सशक्त बनाना और समाज में दान एवं सेवा की सच्ची भावना को जागृत करना रहा।

भीलवाड़ा। आस्था और दान के पावन पर्व मकर संक्रांति पर जब पूरा शहर उत्सव के उल्लास में डूबा था, तब श्री पंचमुखी दरबार सेवा समिति ने सेवा और संस्कार की एक ऐसी नई परिभाषा लिखी, जिसने सामाजिक सरोकार के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मिसाल कायम की है। "एक किट, एक मुस्कान" के संकल्प के साथ समिति ने उन बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी पहुँचाने का बीड़ा उठाया, जो समाज की मुख्यधारा से दूर अभावों में जीवन यापन कर रहे हैं। श्री पंचमुखी मंदिर प्रांगण में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में नेत्रहीन एवं मूक-बधिर बच्चों को शिक्षा की सौगात देकर उनके चेहरों पर जो मुस्कान बिखेरी गई, वह इस पर्व की सार्थकता को चरितार्थ कर रही थी।
समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण दास त्यागी ने कार्यक्रम की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए कहा कि मकर संक्रांति का वास्तविक पुण्य वही है जो किसी के भविष्य को उज्ज्वल बना सके। इसी उद्देश्य के साथ समाज के कमजोर, वंचित और विशेष श्रेणी के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए निःशुल्क 'श्री पंचमुखी दरबार मां सरस्वती शिक्षण सामग्री किट' का वितरण किया गया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शारीरिक बाधाएं किसी भी बच्चे के सपनों के आड़े नहीं आनी चाहिए और यह समिति का प्रयास है कि इन बच्चों को बुनियादी शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
सचिव परमेश्वर दास ने मकर संक्रांति के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह पर्व केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और करुणा का प्रतीक है। उन्होंने शिक्षा को समाज की उन्नति की सबसे मजबूत नींव बताते हुए कहा कि इन जरूरतमंद बच्चों के हाथ में कलम और किताब देना ही सच्ची सेवा है। वितरित की गई विशेष किट में स्कूल बैग, पानी की बोतल, टिफिन बॉक्स, कॉपियां, ड्राइंग बुक, कलर बॉक्स और पेंसिल जैसी आवश्यक सामग्री सम्मिलित थी, जो इन बच्चों की शैक्षणिक यात्रा को सुगम बनाएगी।
कोषाध्यक्ष सच्चिदानंद दास ने इस आयोजन के भावनात्मक पहलू को छूते हुए कहा कि यह वितरण मात्र सामग्री का आदान-प्रदान नहीं था, बल्कि इन विशेष बच्चों के भीतर आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को जगाने का एक प्रयास था। उन्होंने बताया कि जब इन बच्चों ने अपनी नई स्कूल किट को छुआ और महसूस किया, तो उनके चेहरों पर उभरी खुशी इस बात का प्रमाण थी कि समाज आज भी संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ा है।
इस पावन अवसर पर संतों का सानिध्य कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहा था। कुल्लू से विशेष रूप से पधारे श्री महंत रामदास स्वामी जी के साथ अजय रामदास, बृजमोहन दास, प्रेमदास, गोपाल दास और मुकंद दास आदि संतगणों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। संतों ने समिति के इस मानवीय कार्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे 'नर सेवा ही नारायण सेवा' का जीवंत उदाहरण बताया। भीलवाड़ा की धरा पर हुआ यह आयोजन न केवल शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने वाला रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि यदि सामूहिक संकल्प हो, तो समाज के हर वर्ग के जीवन में खुशियों का प्रकाश फैलाया जा सकता है।

Pratahkal Bureau
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