भीलवाड़ा में भक्ति का अनूठा संगम: सिंधु भवन में 23 जनवरी को होगी पंच परमेश्वर मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा
भीलवाड़ा के आर.सी. व्यास नगर स्थित सिंधु भवन में 23 जनवरी को आठवें झूलेलाल मंदिर में पंच परमेश्वर मूर्तियों की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा होगी। सिंधी समाज सेवा संस्थान द्वारा आयोजित इस दो-दिवसीय समारोह में कलश यात्रा, भजन संध्या और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। संत-महात्माओं के सानिध्य में होने वाले इस ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान में समाज के गणमान्य नागरिक और सेवाधारी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे।

भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी भीलवाड़ा के आध्यात्मिक मानचित्र पर एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। सिंधी समाज सेवा संस्थान (उत्तर क्षेत्र) के तत्वावधान में आर.सी. व्यास नगर स्थित सिंधु भवन परिसर में शहर के आठवें श्री झूलेलाल मंदिर का भव्य निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। अब आगामी 22 और 23 जनवरी को इस नवनिर्मित मंदिर में 'पंच परमेश्वर' मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा का दो-दिवसीय ऐतिहासिक और गरिमामयी समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसे लेकर संपूर्ण सिंधी समाज में अभूतपूर्व उत्साह और हर्ष की लहर व्याप्त है।
इस भव्य आयोजन की रूपरेखा तय करने और तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए रविवार को संस्था के आम सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। वरिष्ठ समाजसेवी और संस्था अध्यक्ष लालचंद नथरानी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में समारोह को भव्य स्वरूप देने पर विस्तृत चर्चा की गई। महामंत्री सुनील हेमराजानी ने कार्यक्रम का विवरण साझा करते हुए बताया कि 23 जनवरी को मंदिर में आराध्य देव भगवान झूलेलाल के साथ-साथ राधा-कृष्ण, मातारानी, राम-दरबार और शिव परिवार की प्रतिमाओं की पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न होगी। इस पावन अवसर के साक्षी बनने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारा और प्रसादी का भी प्रबंध किया गया है।
उत्सव का आगाज़ 22 जनवरी को पंच परमेश्वर प्रतिमाओं के जलाभिषेक, हवन और कीर्तन के साथ होगा। इसी दिन एक भव्य कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो श्रद्धा और संस्कृति का अनूठा प्रदर्शन होगी। इस शोभायात्रा की खास बात यह है कि महिलाओं और पुरुषों के लिए एक विशिष्ट ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है, जो एकता और अनुशासन का प्रतीक बनेगा। शाम को बहराणा साहिब की ज्योत प्रज्ज्वलित की जाएगी, जिसके पश्चात भजन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत भजनों से पूरा वातावरण भक्ति के रस में सराबोर हो उठेगा।
इस दो-दिवसीय अनुष्ठान में देश के ख्यातिनाम संत-महात्माओं का सानिध्य प्राप्त होगा। साथ ही, समाज के वरिष्ठ समाजसेवियों, मोतबिरों, विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के पदाधिकारियों और जन-प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति इस आयोजन की महत्ता को द्विगुणित करेगी। अध्यक्ष लालचंद नथरानी ने समाज के प्रत्येक वर्ग से इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर आहुति देने का आह्वान किया है, ताकि यह महोत्सव भीलवाड़ा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सके।
तैयारियों की समीक्षा बैठक के दौरान सेवाधारियों को विभिन्न उत्तरदायित्व सौंपे गए। इस अवसर पर समाज की प्रमुख विभूतियां और सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें तुलसीदास नथरानी, पंकज हेमराजानी, राजकुमार पहलवानी, महेश नथरानी, प्रहलादराय जेठवानी, घनश्याम शामनानी, चंद्रप्रकाश मोतियानी, सतीश हेमराजानी, रमेश अगनानी, दीपेश दत्ता, ललित जेठानी, धनपत तोलानी, रमेश खोतानी और ओमप्रकाश जेठानी सहित कई गणमान्य जन शामिल थे। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि सिंधी संस्कृति और एकजुटता के प्रतीक के रूप में शहर को एक नई पहचान देगा।

Pratahkal Bureau
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