भीलवाड़ा। न्याय प्रणाली के इतिहास में जब भी बड़े बदलाव आते हैं, तो उनका उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक त्वरित और पारदर्शी न्याय पहुँचाना होता है। इसी दिशा में एक निर्णायक कदम बढ़ाते हुए, भीलवाड़ा की धरती पर रविवार को न्यायविदों का एक ऐसा समागम हुआ, जो भविष्य की न्यायिक दिशा तय करने वाला है। राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी, जोधपुर के तत्वावधान में आयोजित इस उच्च-स्तरीय सेमिनार ने न केवल नए आपराधिक और सिविल कानूनों पर चर्चा की, बल्कि न्याय के मंदिर में बैठे अधिकारियों को आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार भी किया।

नगर निगम सभागार की भव्यता के बीच आयोजित इस सेमिनार की कमान राजस्थान उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति उमाशंकर व्यास के हाथों में थी। उन्होंने अपने ओजस्वी संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि कानून केवल किताबों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन ही लोकतंत्र की असली जीत है। इस ऐतिहासिक चर्चा में भीलवाड़ा के जिला एवं सेशन न्यायाधीश अभय जैन और बूंदी के जिला एवं सेशन न्यायाधीश संदीप कुमार शर्मा ने अपने-अपने जिलों का प्रतिनिधित्व किया, जिससे यह आयोजन दो जिलों के न्यायिक ज्ञान का संगम बन गया।

सेमिनार का मुख्य केंद्र बिंदु भारत की बदलती दंड संहिताएँ रहीं। भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 जैसे क्रांतिकारी बदलावों पर गहन मंथन किया गया। चर्चा केवल आपराधिक कानूनों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि सिविल प्रक्रिया संहिता के जटिल पहलुओं, विशेषकर आदेश 7 नियम 11 और आदेश 10 नियम 2 जैसे विषयों पर भी बारीकी से प्रकाश डाला गया। न्यायाधीशों ने अपने व्यावहारिक अनुभवों को साझा करते हुए यह समझने का प्रयास किया कि नए प्रावधानों के तहत मुकदमों के निस्तारण में तेजी कैसे लाई जा सकती है।

पूरे सत्र के दौरान न्यायमूर्ति उमाशंकर व्यास ने मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए न्यायिक अधिकारियों को नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते समय के साथ कानूनी समझ को अपडेट करना न्याय की गरिमा के लिए अनिवार्य है। कार्यक्रम के समापन बेला में भीलवाड़ा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नगेंद्र सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया। यह सेमिनार महज एक चर्चा नहीं, बल्कि राजस्थान की न्यायपालिका को सशक्त बनाने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक सशक्त शंखनाद साबित हुआ है

Pratahkal Bureau

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