भीलवाड़ा।

राजस्थान की जीवनरेखा कही जाने वाली अरावली पर्वतमाला को अवैध खनन से बचाने की मांग एक बार फिर मुखर हो उठी है। प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान ने अरावली के संरक्षण और इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित कराने की पुरजोर अपील करते हुए राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में पारित उस आदेश पर भी पुनर्विचार की मांग की गई है, जिसे लेकर पर्यावरणविदों ने खनन माफियाओं को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की आशंका जताई है।

संस्थान ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि अरावली पर्वतमाला केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के पर्यावरण संतुलन की आधारशिला है। विश्व की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में शुमार अरावली गुजरात से लेकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक विस्तृत है। इसमें स्थित गुरुशिखर, माउंट आबू जैसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल इसकी समृद्ध विरासत के प्रतीक हैं, जिसकी अधिकतम ऊंचाई लगभग 1722 मीटर मानी जाती है।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि अरावली क्षेत्र में खनन को बढ़ावा मिला तो इसके दूरगामी और घातक परिणाम सामने आ सकते हैं। अरावली पर्वतमाला भूमिगत जल रिचार्ज, मरुस्थलीकरण पर नियंत्रण और तापमान संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके कमजोर होने से राज्य में सूखा, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक असंतुलन की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है, जिनके संकेत वर्तमान में भी देखे जा रहे हैं।

संस्थान ने यह भी रेखांकित किया कि जयपुर सहित राज्य के कई जिलों में स्थित ऐतिहासिक, प्राकृतिक और पर्यटन स्थल सीधे तौर पर अरावली से जुड़े हुए हैं। यहां के वन क्षेत्र, झरने, राष्ट्रीय उद्यान और समृद्ध जैव विविधता राजस्थान की पहचान हैं। लेकिन लगातार हो रहे अवैध खनन, वनों की कटाई और अनियंत्रित औद्योगिक गतिविधियों ने इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर क्षति पहुंचाई है।

केंद्र सरकार से अरावली पर्वतमाला को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने, अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और संरक्षण के लिए कठोर कानून लागू करने की मांग की गई है। साथ ही स्थानीय समुदायों को संरक्षण की प्रक्रिया में भागीदार बनाने और पर्यावरणीय सरोकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया खनन संबंधी आदेश पर पुनर्विचार की अपील भी इसी संदर्भ में की गई है।

ज्ञापन के माध्यम से अंत में यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया है कि अरावली का संरक्षण केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि राजस्थान के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। पर्यावरण प्रेमियों को उम्मीद है कि सरकार और न्यायपालिका इस गंभीर मुद्दे पर संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय लेकर आने वाली पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगी।

Pratahkal Bureau

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