इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राज श्रीमाली ने केंद्र सरकार पर किसान और मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और तेज किया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि 10 अगस्त को राजस्थान के सभी जिला मुख्यालयों पर किसान और मजदूरों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

भीलवाड़ा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान श्रीमाली ने कहा कि यदि सरकार ने मजदूरों और किसानों की समस्याओं की अनदेखी जारी रखी तो अगला आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग भी उठाई जा सकती है।

श्रीमाली ने आरोप लगाया कि देश में नई आर्थिक नीतियों और बदलती तकनीक के कारण मजदूरों और किसानों के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कई क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित हो रही है, लेकिन इससे पारंपरिक रोजगार पर निर्भर मजदूर और किसान वर्ग प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप था कि सरकार की नीतियां बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में झुकी हुई हैं, जबकि किसान और मजदूर लगातार शोषण का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि किसान और मजदूर अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर खड़े हो गए तो देश की राजनीति की दिशा बदल सकती है। उन्होंने सरकार से श्रमिकों और किसानों के हितों की रक्षा करने वाली नीतियां लागू करने की मांग की।

इस दौरान श्रीमाली ने कांग्रेस संगठन पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इंटक को लंबे समय से राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। उनका दावा था कि पिछले करीब 20 वर्षों से कांग्रेस ने इंटक से जुड़े नेताओं को विधानसभा का टिकट नहीं दिया, जबकि पहले भीलवाड़ा, उदयपुर सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में इंटक कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का अवसर मिलता था। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग की अनदेखी का राजनीतिक नुकसान कांग्रेस को भी उठाना पड़ा है।

श्रीमाली ने कहा कि वर्तमान समय में राजनीतिक दलों में श्रमिक नेतृत्व की बजाय पूंजीपतियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि मजदूर समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनके सम्मान तथा अधिकारों की रक्षा होना आवश्यक है।

इंटक के जिला अध्यक्ष दीपक व्यास ने आरोप लगाया कि भीलवाड़ा में करोड़ों रुपये का डीएमडी फंड उपलब्ध होने के बावजूद मजदूरों के कल्याण के लिए उसका प्रभावी उपयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में श्रमिकों का लगातार शोषण हो रहा है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

दीपक व्यास ने कहा कि भीलवाड़ा में करीब 400 टेक्सटाइल फैक्ट्रियां, अनेक स्पिनिंग यूनिट और प्रोसेस हाउस संचालित हैं, लेकिन इतनी बड़ी औद्योगिक नगरी होने के बावजूद मजदूरों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं हो रही है। उन्होंने श्रमिकों के लिए बेहतर सुविधाएं, सुरक्षा और अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।

पत्रवार्ता के दौरान कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश व्यास, इंटक प्रदेश महामंत्री नारायण लाल गुर्जर, जिला महिला अध्यक्ष ममता शर्मा सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे। उनके बीच किसान और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार तथा राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी चर्चा की गई।

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