भीलवाड़ा में चातुर्मास के तहत पहली बार 108 वाणी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ का ऐतिहासिक आयोजन 13 से 19 सितंबर तक किया जाएगा। माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित दैनिक चातुर्मासिक सत्संग के दौरान अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने इसकी जानकारी दी।

सोमवार को ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत नाग पंचमी पर आयोजित सत्संग में आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने भारतीय संस्कृति को अर्चना की संस्कृति बताते हुए कहा कि भारत में नदी, वृक्ष और नाग तक की पूजा होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय वैदिक संस्कृति जैसी उदार अन्य कोई संस्कृति नहीं हो सकती, जहां नाग को भी दूध पिलाया जाता है।

आचार्यश्री ने कहा कि व्यक्ति को अपना जीवन भगवत अर्चना में समर्पित कर देना चाहिए। जीवन में अर्चन भक्ति कर सके या न कर सके, लेकिन कभी भी अड़चन भक्ति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नौ भक्ति में पांचवें स्थान पर बताई गई अर्चन भक्ति मध्यमार्गी है और अर्चन भक्ति परमानंद की अनुभूति करा सकती है।

उन्होंने कहा कि हमारी भाषा और आचरण हमेशा अच्छे होने चाहिए। शब्दों से ही व्यक्ति के संस्कार एवं खानदान की पहचान हो जाती है। भाषा में मिठास के साथ सम्मान के भाव होने चाहिए।

नाग पंचमी के संदर्भ में आचार्यश्री ने कहा कि जब हम नाग की पूजा करते हैं तो यह भी ध्यान रखना चाहिए कि नाग कभी नाग का बैरी नहीं होता, लेकिन इंसान इंसान को देखना पसंद नहीं करता। तृष्णा और सपनों में भटक रहे आदमी की आंखों में आदमी ही खटक रहा है। उन्होंने दुर्जन की संगत से हमेशा बचने की बात कही। आचार्यश्री ने कहा कि बिच्छू की पूंछ में जहर होता है, लेकिन दुर्जन व्यक्ति के अंग-अंग में जहर होता है। सर्प से ज्यादा जहर इंसान के अंदर दिखाई दे रहा है। हमारी नजर अच्छी चीजों पर नहीं, बल्कि बुरी चीजों पर ही जाती है। उन्होंने कहा कि इस कर्म जगत में कर्मों का फल तो भोगना ही पड़ेगा।







सत्संग में आचार्य रामदयालजी महाराज ने बताया कि चातुर्मास के दौरान 13 से 19 सितंबर तक भीलवाड़ा में पहली बार 108 वाणी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ का ऐतिहासिक विराट आयोजन होगा। इसमें 108 वाणी पाठक बैठेंगे और निरंतर वाणी पाठ करेंगे। ये सभी पाठक पुरुष श्रद्धालु होंगे, जो भीलवाड़ा सहित देश के विभिन्न स्थानों से आएंगे।

इस अवधि में सुबह 8 से 11 बजे तक वाणीजी के प्रवचन होंगे। दोपहर 2 से 5 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन होगा। इस दौरान 108 भागवत का मूल पाठ भी किया जाएगा।

आचार्यश्री ने कहा कि स्वामी रामचरणजी महाराज की पावन भूमि पर उनकी कृपा से विश्व शांति चातुर्मास समिति द्वारा विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से यह आयोजन किया जा रहा है।

आचार्यश्री से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। कुछ श्रद्धालुओं ने भजन की प्रस्तुति भी दी। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती होती है। रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story