भरतपुर के टहरकी में गूंजी जिकड़ी की तान: मकर संक्रांति पर उमड़ा जनसैलाब, गुरुवार को होगा सुरों का महासंग्राम
भरतपुर के टहरकी गांव में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित ऐतिहासिक जिकड़ी भजन मेले में उमड़ी हजारों की भीड़। विमलेश चाहर और सविता डागुर समेत दिग्गज गायकों ने रामायण-महाभारत के प्रसंगों से बांधा समां। गुरुवार को होगा भव्य फाइनल मुकाबला। जानिए इस प्राचीन परंपरा और क्षेत्रीय उत्साह की पूरी रिपोर्ट।

भरतपुर। राजस्थान की लोक संस्कृति और भक्ति रस की अनूठी त्रिवेणी मकर संक्रांति के पावन पर्व पर भरतपुर के टहरकी गांव में पूरी भव्यता के साथ प्रवाहित हो रही है। ग्राम पंचायत सिनपिनी के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक गांव टहरकी में दशकों पुरानी परंपरा को जीवंत रखते हुए प्राचीन जिकड़ी भजन मेले का आगाज हुआ, जिसने समूचे क्षेत्र को भक्तिमय और उत्साहपूर्ण वातावरण में सराबोर कर दिया है। मकर संक्रांति के अवसर पर यह मेला अपने पूरे परवान पर है, जहाँ लोक गायकों की जुगलबंदी और पौराणिक आख्यानों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस महाकुंभ का बहुप्रतीक्षित फाइनल मुकाबला गुरुवार को आयोजित किया जाएगा, जिसे लेकर क्षेत्र में भारी उत्सुकता देखी जा रही है।
स्थानीय निवासी और उप प्राचार्य भूपेंद्र सिंह मीना ने इस सांस्कृतिक धरोहर पर प्रकाश डालते हुए बताया कि टहरकी का यह जिकड़ी मेला कई दशकों से क्षेत्रीय पहचान का प्रतीक बना हुआ है। मेले की लोकप्रियता का आलम यह है कि इसमें ग्राम पंचायत सिनपिनी, मूढ़ोता, झारोली, बांसी, महुआ, लुधावई और माढ़ोनी सहित आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में श्रोता अपनी जड़ों से जुड़ने और लोक संगीत का आनंद लेने पहुंचे हैं। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद जनसमूह का जोश यह बताने के लिए पर्याप्त है कि आज भी ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक विधाएं कितनी गहरी पैठ रखती हैं।
इस सुरम्य आयोजन में जिकड़ी भजन गायकों के बीच जबरदस्त कलात्मक संघर्ष देखने को मिला। मंच पर विमलेश चाहर, प्रहलाद पुरा मालोनी, राम अवतार ओंडेल गद्दी, सविता डागुर खेर जटारी, पवन जगनेर और ओमप्रकाश शर्मा निभेरा जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी गायकी का जौहर दिखाया। इन कलाकारों ने रामायण और महाभारत के प्रेरक प्रसंगों के साथ-साथ आधुनिक काल से जुड़ी प्रासंगिक कथाओं को लोक धुनों में पिरोकर प्रस्तुत किया। श्रोताओं ने हर एक छंद और आलाप पर तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। यह केवल मनोरंजन मात्र नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी पौराणिक विरासतों से रूबरू कराने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए बतौर अतिथि विजयपाल प्रधान, शेर सिंह प्रधान, हमवीर फौजदार और थान सिंह इंदौलिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय प्रबुद्धजनों और युवाओं की टोली सक्रिय दिखी, जिसमें हरिकिशन, श्याम सुंदर शर्मा, महेंद्र सिंह, मुकेश, ओमप्रकाश, प्रताप और राजेश शर्मा सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने अपना पूर्ण सहयोग प्रदान किया। टहरकी का यह मेला न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को भी सुदृढ़ करता है। अब सभी की निगाहें गुरुवार को होने वाले फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं, जहाँ सुरों की इस जंग का विजेता घोषित किया जाएगा।

Mukesh Kumar, Bharatpur
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