भुसावर। आधुनिकता की चकाचौंध और मोबाइल गेमिंग के बढ़ते प्रभाव के बीच राजस्थान के ऐतिहासिक कस्बे भुसावर में आज भी लोक संस्कृति और पारंपरिक खेलों की खुशबू महक रही है। मकर संक्रांति के पावन पर्व की आहट मिलते ही कस्बे की गलियां और सार्वजनिक स्थान एक बार फिर बचपन की यादों से गुलजार हो उठे हैं। यहाँ वर्षों पुरानी 'कंचा-गोली' खेलने की परंपरा आज भी न केवल कायम है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए शारीरिक और सामाजिक विकास का एक सशक्त माध्यम बनी हुई है।

जैसे-जैसे सूर्य के उत्तरायण होने का समय नजदीक आ रहा है, भुसावर के कानूनगो मोहल्ला, पहाड़िया मोहल्ला, शैतान पाड़ा, कहार मोहल्ला, राजा मंडी, कुंडा सड़क मार्ग और रणधीरगढ़ रोड जैसे इलाकों में बच्चों और युवाओं की टोलियां जमीन पर निशाना साधते हुए नजर आने लगी हैं। जहाँ एक ओर आज के दौर में माता-पिता बच्चों को मोबाइल फोन थमाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं, जिससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध हो रहा है, वहीं भुसावर के ये बच्चे धूल भरी गलियों में कांच की गोलियों के साथ पसीना बहाकर स्वस्थ जीवनशैली का उदाहरण पेश कर रहे हैं। इन पारंपरिक खेलों को खेलते बच्चों को देख न केवल बुजुर्गों की यादें ताजा हो रही हैं, बल्कि शहर से आने वाले सैलानी और प्रवासी बच्चे भी इस अनूठी संस्कृति को देखकर मंत्रमुग्ध हैं और इसके प्रति जिज्ञासा जता रहे हैं।

स्थानीय युवा और प्रतिभागी जय शर्मा, वैभव, ध्रुव शर्मा, राघवेंद्र और विष्णु ने इस परंपरा के प्रति अपना उत्साह साझा करते हुए बताया कि कंचों का खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एकाग्रता और सामूहिकता का प्रतीक है। उनके अनुसार, 'कंचा लड़ाने' का वास्तविक अभिप्राय यह है कि उम्र बीतने के बावजूद इंसान के भीतर का बचपन जीवित रहे। उन्होंने बताया कि यहाँ आज भी खटका, एकपाड़ा, खरीज और गुल्लक पाड़ा जैसे कंचों के विभिन्न स्वरूपों को पूरी शिद्दत के साथ खेला जाता है। इन बच्चों ने सामूहिक रूप से अपील की है कि नई पीढ़ी को मोबाइल की वर्चुअल दुनिया को छोड़कर अपनी मिट्टी के खेलों को अपनाना चाहिए। भुसावर की इन गलियों से उठती कंचों की खनक यह संदेश दे रही है कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, लेकिन जो आनंद और शारीरिक सौष्ठव जमीन से जुड़े खेलों में है, वह बंद कमरों के मोबाइल गेम में कभी नहीं मिल सकता।

Mohan Joshi, Bharatpur

Mohan Joshi, Bharatpur

नाम: मोहन लाल जोशी

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: भरतपुर (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): तहसील रिपोर्टिंग, क्राइम (अपराध), एग्रीकल्चर फार्मिंग (कृषि), प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जनसमस्याएं

परिचय एवं अनुभव 

मोहन लाल जोशी को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में एक लंबा और विविध अनुभव है। वह वर्तमान में भरतपुर क्षेत्र से विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनके करियर का विवरण निम्नलिखित है:

  • राजस्थान पत्रिका: इन्होंने 10 वर्षों तक राजस्थान पत्रिका में अपनी सेवाएं दी हैं, जहाँ मुख्य रूप से क्राइम, एग्रीकल्चर फार्मिंग और जन समस्याओं से संबंधित विषयों पर विस्तृत कवरेज की।
  • ईटीवी राजस्थान (जयपुर): 14 साल पहले इन्होंने ईटीवी राजस्थान, जयपुर के साथ काम किया।
  • शेर-ए-हिंदुस्तान: इस मीडिया संस्थान के साथ भी काम करने का अनुभव।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

मोहन लाल जोशी शैक्षणिक और तकनीकी रूप से पत्रकारिता में उच्च योग्यता रखते हैं:

  • स्नातक (Graduation)
  • बीजेएमसी (BJMC): बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन
  • पीएचडी (Ph.D.): पत्रकारिता (Journalism) में उनकी पीएचडी वर्तमान में जारी है।

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