भरतपुर में गूंजी महाराणा प्रताप की शौर्य गाथा: 'इतिहास नहीं, भावी पीढ़ियों के चरित्र का आधार हैं प्रताप'
भरतपुर में सर्व समाज महासभा द्वारा महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर आयोजित भव्य संगोष्ठी में वक्ताओं ने प्रताप को चरित्र निर्माण का आधार बताया। ओजपूर्ण कविताओं और वीर गाथाओं के बीच पन्नाधाय के त्याग और चेतक की स्वामीभक्ति को याद किया गया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में विजयी छात्र पुरस्कृत हुए, जिसने युवाओं में राष्ट्रनिष्ठा का नया संचार किया।

भरतपुर। राजस्थान की वीर प्रसूता माटी के कण-कण में रचे-बसे अदम्य साहस और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप केवल अतीत का पन्ना नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों के चरित्र निर्माण की जीवंत पाठशाला हैं। 20 जनवरी को भरतपुर के रणजीत नगर स्थित आदर्श स्कूल परिसर में संचालित महाराणा प्रताप छात्रावास में जब सर्व समाज महासभा के तत्वावधान में उनकी पुण्यतिथि मनाई गई, तो हॉल में मौजूद हर शख्स की धमनियों में देशभक्ति का संचार हो उठा। यह संगोष्ठी केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं थी, बल्कि मेवाड़ के उस ओजस्वी इतिहास के पुनर्जीवन का केंद्र बनी, जिसने सदियों से भारतीय अस्मिता को झुकने नहीं दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ होते ही वक्ताओं ने न केवल प्रताप, बल्कि उनके व्यक्तित्व को गढ़ने वाले नींव के पत्थरों—महाराजा उदय सिंह, माता पन्नाधाय और उनके मूक किंतु वफादार साथी घोड़े चेतक के बलिदानों की परतें खोलीं। डॉ. अविनाश सोनी के उद्बोधन ने सभा में जोश भर दिया, जब उन्होंने कहा कि हम उस राजस्थान की संतान हैं जहाँ शीश कट जाने के बाद भी योद्धा की कृपाण दुश्मन पर प्रहार करती रहती है। इसी ओज को आगे बढ़ाते हुए डॉ. कृष्ण कन्हैया शर्मा ने अपनी काव्यमयी वाणी से हल्दीघाटी के युद्ध के दृश्यों को सजीव कर दिया। उनकी पंक्तियाँ—"मैं प्रताप का हर बलिदानी तेवर अब दिखलाता हूँ, हल्दीघाटी की माटी की पावन कथा सुनाता हूँ"—ने युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
संगोष्ठी में वैचारिक गहराई और ऐतिहासिक तथ्यों का संगम भी देखने को मिला। महासभा के महासचिव अनिल भारद्वाज ने मेवाड़ की रक्षा में महाराज उदय सिंह के सामरिक योगदान को रेखांकित किया, वहीं जीवनलाल शर्मा ने माता पन्नाधाय के बलिदान को राष्ट्रभक्ति और मातृत्व की पराकाष्ठा बताया। जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघल ने अपने संबोधन में एक गंभीर और प्रभावी संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस समाज की आने वाली पीढ़ी प्रताप के संघर्ष, पन्नाधाय के त्याग और चेतक की स्वामीभक्ति के मर्म को आत्मसात कर लेती है, उस समाज की स्वतंत्रता और स्वाभिमान को दुनिया की कोई भी ताकत कभी गुलाम नहीं बना सकती।
आयोजन की गरिमा को बढ़ाने के लिए सचिव कृष्णकांत शर्मा, संगठन मंत्री गौरव पाराशर, महिला शहर अध्यक्ष सरबजीत कौर, उपाध्यक्ष सरोज शर्मा, मीनाक्षी खत्री, प्रेमचंद लवानिया, राजेंद्र दंडोतिया, केशव देव शर्मा, और सरदार कुलदीप सिंह जैसे प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। साथ ही पूर्व सरपंच महेश वाल्मीकि, धर्मवीर सिंह तुहिया, वीरू सोगर और टीटू महावर सहित समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। छात्रावास के संचालक वीरेंद्र एवं संजय गुप्ता के मार्गदर्शन में बच्चों को प्रताप के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग सुनाए गए और वीर रस के गीतों से पूरा परिसर गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में बौद्धिक चेतना का परीक्षण करने के लिए बच्चों के बीच एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। महाराणा प्रताप के जीवन पर आधारित इस प्रतियोगिता में अपनी मेधा का परिचय देने वाले प्रथम पांच विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। यह संगोष्ठी इस संकल्प के साथ संपन्न हुई कि प्रताप के आदर्शों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यवहार और चरित्र में ढालना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Pratahkal Bureau
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