डीग के तालाबों की बदहाली पर 22वें दिन भी धरना जारी, प्रशासनिक अनदेखी से आंदोलनकारियों का सब्र जवाब के कगार पर
डीग में तालाबों में गंदे पानी की निकासी, मरती मछलियों और घाटों की सफाई की मांग को लेकर पूर्व जिला उपाध्यक्ष गिरीश शर्मा के नेतृत्व में 22वें दिन भी धरना जारी। आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल की चेतावनी दी।

डीग, 17 दिसंबर।
डीग शहर के ऐतिहासिक तालाबों में बढ़ते प्रदूषण, गंदे पानी की निकासी और लगातार मर रही मछलियों के मुद्दे को लेकर चल रहा जनआंदोलन बुधवार को 22वें दिन भी जारी रहा। पूर्व जिला उपाध्यक्ष गिरीश शर्मा के नेतृत्व में स्थानीय नागरिकों ने तालाबों की सफाई और गटर के पानी की रोकथाम की मांग को लेकर धरना स्थल पर अपनी आवाज बुलंद रखी। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता ने शहर की आस्था, पर्यावरण और पर्यटन—तीनों को गंभीर संकट में डाल दिया है।
धरने को संबोधित करते हुए गिरीश शर्मा ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलनकारी भूख हड़ताल और आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने बताया कि डीग शहर के लगभग 30 प्रतिशत घरों का गटर और शौचालय का पानी बिना किसी शोधन के सीधे तालाबों में छोड़ा जा रहा है। कई घरों में सेप्टिक टैंक तक नहीं बने हैं, जिससे मलजल सीधे जलाशयों में पहुंच रहा है।
गिरीश शर्मा ने धार्मिक और सामाजिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि मल मास के दौरान 84 कोस परिक्रमा में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इन तालाबों में स्नान करते हैं और प्रसाद स्वरूप इसी जल का ग्रहण करते हैं, जो दुर्गंधयुक्त और प्रदूषित है। वहीं, जल महल देखने आने वाले हजारों पर्यटक भी बदबूदार पानी और गंदगी देखकर निराश लौटने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे डीग की पर्यटन छवि को गहरा आघात पहुंच रहा है। तालाबों के दूषित पानी के कारण मछलियों की मौत ने स्थिति की गंभीरता और बढ़ा दी है।
धरने में बड़ी संख्या में शहर की महिलाएं भी शामिल रहीं, जिन्होंने स्वच्छ जल और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक गटर के पानी की निकासी रोकी नहीं जाती और घाटों की समुचित सफाई नहीं होती, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा।
इस बीच, सिंचाई विभाग की सहायक अभियंता देवेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्व में डीग एस्केप क्षेत्र में बने मकानों के मालिकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद कई मकान मालिकों ने लैट्रिन के पाइप सीधे डीग एस्केप में डाल रखे हैं और जल निकासी क्षेत्र में अतिक्रमण भी कर लिया गया है, जिससे समस्या और जटिल हो गई है।
डीग के तालाब केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान हैं। ऐसे में यह आंदोलन अब केवल सफाई की मांग नहीं, बल्कि डीग की विरासत, आस्था और भविष्य को बचाने की लड़ाई बनता जा रहा है। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर अब पूरे शहर की नजरें टिकी हुई हैं।
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Pratahkal Bureau
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