डीग, 1 दिसंबर: शहर के तालाबों में गंदे पानी के जमाव और मरती मछलियों के मुद्दे को लेकर गिरीश शर्मा, पूर्व जिला उपाध्यक्ष के नेतृत्व में स्थानीय नागरिक सोमवार को छठवें दिन भी धरने पर बैठे। धरने के दौरान गिरीश शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वे भूख हड़ताल और आत्महत्या तक करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी।

गिरीश शर्मा ने बताया कि डीग शहर के लगभग 30 प्रतिशत घरों का गटर का पानी सीधे तालाबों में पहुंचता है। इसके अलावा, कई घरों ने लैट्रिन टैंक तक नहीं बनवाए हैं, जिससे मानव मल का पानी सीधे तालाबों में जाता है। उन्होंने बताया कि जब मासिक 84 कोस परिक्रमा चलती है, तब हजारों श्रद्धालु इन तालाबों में स्नान करते हैं और बदबूदार जल ग्रहण करते हैं। इसके साथ ही, शहर में जल महल को देखने आने वाले हजारों पर्यटक भी इस स्थिति से प्रभावित होते हैं।

गिरीश शर्मा ने आरोप लगाया कि तीनों संबंधित विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग के दावे उल्टे हैं, जो 200 मीटर की दूरी में बने मकानों पर नोटिस जारी करता है, लेकिन तालाबों की सफाई के लिए कोई पहल नहीं करता। सिंचाई विभाग ने डीग स्केप के नाम पर लाखों रुपये का टेंडर जारी किया था, लेकिन डीग एस्केप आज भी टूटी-फूटी स्थिति में है, और कुछ लोगों ने इसके हिस्से पर कब्जा कर निर्माण भी कर दिया है। विभाग मौन होकर बैठा है।

गिरीश शर्मा ने याद दिलाया कि एक वर्ष पूर्व तत्कालीन जिला कलेक्टर श्रुति भारद्वाज ने स्वयं नाव के जरिए गोपाल सागर का निरीक्षण किया था और मरती मछलियों को निकालने के साथ-साथ साफ-सफाई के निर्देश दिए थे। लेकिन आज तक गोपाल सागर की कोई सफाई नहीं की गई है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक गटर का पानी और घाटों की सफाई नहीं होगी, उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।

अनशन स्थल पर जतिन गुप्ता, रघुवीर सैनी, शंकर सैनी, नरेश सैनी, देवेंद्र, गोविंद, राजीव, बबलू पत्ते, पुष्कर कुलश्रेष्ठ, बबलू और कन्हैया डागुर सहित अन्य नागरिक भी मौजूद रहे।

इस आंदोलन ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और शहरवासियों में तालाबों की सफाई तथा पर्यावरणीय सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ा दी है।

Pratahkal Bureau

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