भरतपुर। लोहागढ़ की वीर धरा पर मानवता और सेवा की एक ऐसी अनूठी इबारत लिखी गई है, जिसने न केवल शिक्षक भर्ती परीक्षा देने आए युवाओं का दिल जीत लिया, बल्कि समाज सेवा की एक नई मिशाल भी पेश की है। राष्ट्रीय मीणा महासभा की भरतपुर इकाई ने कड़ाके की ठंड और परीक्षा के तनाव के बीच हजारों परीक्षार्थियों के लिए अपने द्वार खोल दिए, जिससे भरतपुर शहर में सेवा का एक महाकुंभ उमड़ पड़ा। १६ जनवरी से २० जनवरी तक चले इस सेवा यज्ञ ने साबित कर दिया कि जब समाज की सामूहिक शक्ति एकजुट होती है, तो वह किसी भी सरकारी तंत्र से बड़ी राहत प्रदान कर सकती है।

इस पुनीत कार्य का नेतृत्व कर रहे कार्यक्रम के संयोजक एवं प्रदेश संगठन सचिव भूपेंद्र सिंह मीणा (उप प्राचार्य) ने बताया कि इस सेवा प्रकल्प का मुख्य उद्देश्य सुदूर क्षेत्रों से आए परीक्षार्थियों को घर जैसा वातावरण उपलब्ध कराना था। नगर निगम आयुक्त श्रवण कुमार विश्नोई और राजस्व अधिकारी तेजराम मीणा के विशेष मार्गदर्शन और अतुलनीय सहयोग से महासभा ने परीक्षार्थियों के लिए ठहरने, सात्विक भोजन और विश्राम की निःशुल्क और विश्वस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की। पाँच दिनों तक चले इस अभियान में सर्व समाज के अभ्यर्थियों ने बिना किसी भेदभाव के इन सुविधाओं का लाभ उठाया, जिससे यह आयोजन केवल एक समाज तक सीमित न रहकर 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना का प्रतीक बन गया।

आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि यहाँ केवल शारीरिक सुविधाओं का ही ध्यान नहीं रखा गया, बल्कि युवाओं के मानसिक और नैतिक उत्थान के लिए भी प्रयास किए गए। प्रतिदिन आयोजित होने वाली भजन संध्याओं ने जहाँ परीक्षार्थियों की थकान मिटाई, वहीं उन्हें भविष्य के लिए एक जिम्मेदार नागरिक बनाने का संकल्प भी दिलाया गया। महासभा के बैनर तले युवाओं ने सामूहिक रूप से प्रतिज्ञा ली कि वे नौकरी लगने के उपरांत प्रकृति के ऋण को चुकाने के लिए एक पेड़ 'माँ प्रकृति' के नाम समर्पित करेंगे। साथ ही, समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करते हुए युवाओं ने 'बिना दहेज' के विवाह करने का संकल्प लिया, जिसने आयोजन को एक सामाजिक क्रांति का रूप दे दिया। युवाओं के चेहरे पर इस बदलाव के प्रति जो उत्साह और रुझान दिखा, वह आने वाले स्वर्णिम भविष्य की एक स्पष्ट झलक थी।

इस सेवा संकल्प को धरातल पर उतारने में राष्ट्रीय मीणा महासभा के समर्पित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. योगेन्द्र मीणा, प्रताप सिंह मीणा, सहदेव सिंह, राजेन्द्र सिंह और प्रेम सिंह ने अपनी रणनीतिक भूमिका निभाई। वहीं विक्रम नवल, अशोक महाराजसर, जितेन्द्र ऊनापुर, मनीष जगजीवनपुर, वीरेन्द्र मालीपुरा, विजेन्द्र मीणा, कपूर चंद जैयचोली और मेवाराम ने जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाले रखा। नगर निगम के सजग प्रहरी लक्ष्मीनारायण मिलकपुर का सहयोग भी इस दौरान बेहद सराहनीय रहा। भरतपुर की यह पहल आज पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो यह संदेश देती है कि यदि नियत साफ हो और प्रयास सामूहिक हों, तो सेवा के माध्यम से समाज की तस्वीर बदली जा सकती है।

Pratahkal Bureau

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