भुसावर के निठार में ऐतिहासिक बावड़ियाँ इतिहास के साए में उदास
भरतपुर जिले के भुसावर उपखंड के निठार गांव की चार सौ वर्ष पुरानी ऐतिहासिक बावड़ियाँ समय और सरकारी उदासीनता की मार झेल रही हैं। स्थानीय लोगों ने इन बावड़ियों के संरक्षण और पर्यटन मानचित्र में शामिल करने की आवश्यकता जताई है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास संरक्षित रहे।

भरतपुर। पूर्वी राजस्थान का सिंह द्वार कहलाने वाला भरतपुर जिला वीरता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। जिले में रियासत और सल्तनत काल के दौरान राजा-महाराजाओं ने जल संचय और सुरक्षा के उद्देश्य से पर्वत-मालाओं और ऊंचे मैदानों पर किले, दुर्ग और बावड़ियाँ बनवाई थीं। समय के बदलाव और सरकारी उदासीनता के कारण इन बावड़ियों की स्थिति अब चिंताजनक हो गई है।
भुसावर उपखंड के निठार गांव में कभी सात बावड़ियाँ थीं, जिनमें से अब केवल दो ही अस्तित्व में हैं। ग्राम पंचायत निठार के पूर्व सरपंच भरती लाल मीणा और नरेंद्र मीणा ने बताया कि यह गांव लगभग चार सौ वर्ष पहले बसाया गया था और इसे आदर्श गांव के रूप में जाना जाता है। रियासत काल में राजा रीठ ने इस गांव की स्थापना पहाड़ी पर की थी। उस समय यह क्षेत्र गुर्जर जाति के लिए प्रमुख था और चंदेल वंश से जुड़े देव नारायण बाबा यहीं निवास करते थे।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, निठार क्षेत्र पहले अरावली पर्वत मालाओं के बीच घने जंगल और जंगली जानवरों के लिए जाना जाता था। गांव में देव महराज की बहन एला दी माता भी निवास करती थीं, जिन्होंने अपने साहसिक कार्यों के लिए प्रसिद्धि पाई, जैसे दिल्ली के मुगल बादशाह के पागल हाथी को रोकना। धीरे-धीरे गांव के बुजुर्ग पहाड़ी से नीचे बस गए और आज के स्वरूप में गांव बसावट विकसित हुई।
गांव के लोगों ने बताया कि वर्तमान में सिर्फ दो बावड़ियाँ जल संचय के लिए बची हैं, जो बेहद बदहाल स्थिति में हैं। कुछ वर्ष पूर्व ग्रामीणों के सहयोग से इन बावड़ियों की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन राज्य सरकार और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण ये ऐतिहासिक स्थल अभी भी संरक्षण की प्रतीक्षा में हैं।
स्थानीय समाज ने सुझाव दिया है कि रियासत काल में बनी इन बावड़ियों का जीर्णोद्धार कर उन्हें पर्यटन मानचित्र में शामिल किया जाना चाहिए। विशेष रूप से अलीपुर, वैर, हाथोडी, बल्लभगढ़ और निठार क्षेत्र की बावड़ियों के संरक्षण और मरम्मत कार्य से न केवल ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित होंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को राजस्थान की गौरवपूर्ण संस्कृति और जल संरचना के महत्व की जानकारी भी मिलेगी।

Mohan Joshi, Bharatpur
नाम: मोहन लाल जोशी
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: भरतपुर (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): तहसील रिपोर्टिंग, क्राइम (अपराध), एग्रीकल्चर फार्मिंग (कृषि), प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जनसमस्याएं
परिचय एवं अनुभव
मोहन लाल जोशी को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में एक लंबा और विविध अनुभव है। वह वर्तमान में भरतपुर क्षेत्र से विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनके करियर का विवरण निम्नलिखित है:
- राजस्थान पत्रिका: इन्होंने 10 वर्षों तक राजस्थान पत्रिका में अपनी सेवाएं दी हैं, जहाँ मुख्य रूप से क्राइम, एग्रीकल्चर फार्मिंग और जन समस्याओं से संबंधित विषयों पर विस्तृत कवरेज की।
- ईटीवी राजस्थान (जयपुर): 14 साल पहले इन्होंने ईटीवी राजस्थान, जयपुर के साथ काम किया।
- शेर-ए-हिंदुस्तान: इस मीडिया संस्थान के साथ भी काम करने का अनुभव।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
मोहन लाल जोशी शैक्षणिक और तकनीकी रूप से पत्रकारिता में उच्च योग्यता रखते हैं:
- स्नातक (Graduation)
- बीजेएमसी (BJMC): बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन
- पीएचडी (Ph.D.): पत्रकारिता (Journalism) में उनकी पीएचडी वर्तमान में जारी है।
