बयाना में भीषण जाम का तांडव: अतिक्रमण की भेंट चढ़ी कस्बे की रफ्तार, घंटों सड़कों पर कैद रहने को मजबूर आमजन
बयाना कस्बे में अतिक्रमण के चलते लग रहे भीषण जाम से आम जनता त्रस्त है। गांधी चौक से लेकर पुरानी मंडी तक सड़कों पर दुकानदारों के कब्जे ने आवागमन ठप कर दिया है। प्रशासन की सुस्त कार्रवाई और बढ़ते अतिक्रमण के बीच स्कूली बच्चों और मरीजों को हो रही भारी परेशानी पर पढ़िए देवीसिंह प्रजापत की विशेष रिपोर्ट।

बयाना। राजस्थान के भरतपुर जिले का ऐतिहासिक बयाना कस्बा इन दिनों विकास की रफ्तार के बजाय भीषण जाम के झंझावातों से जूझ रहा है। कस्बे की मुख्य धमनियों में दिन ढलते ही वाहनों और पैदल राहगीरों का ऐसा रेला उमड़ता है कि समूचा बाजार क्षेत्र एक अभेद्य किले में तब्दील हो जाता है। घंटों तक लगने वाले इस जाम ने न केवल व्यापारियों का व्यापार प्रभावित किया है, बल्कि आमजन के मानसिक सुकून को भी छीन लिया है। स्थानीय संवाददाता देवीसिंह प्रजापत की रिपोर्ट के अनुसार, कस्बे की यह समस्या अब एक नासूर बन चुकी है, जिसका समाधान फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है।
जाम की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गांधी चौक से लेकर छोटा बाजार, जवाहर चौक, महादेव गली, आजाद मंडी और पुरानी मंडी जैसे प्रमुख व्यापारिक केंद्र पूरी तरह ठप पड़ जाते हैं। इस अव्यवस्था के पीछे सबसे बड़ा कारण बेखौफ अतिक्रमण है। बाजार के दुकानदारों ने अपनी दुकानों की सीमा लांघते हुए सड़क पर मेज, तख्त और अन्य सामान सजा रखे हैं। सड़कों की चौड़ाई जो पहले ही सीमित थी, इस अतिक्रमण के चलते और भी संकरी हो गई है। स्थिति यह है कि दोपहिया वाहनों का निकलना भी दूभर हो जाता है, जिससे राहगीरों के बीच आए दिन कहासुनी और तनाव का माहौल बना रहता है।
स्थानीय निवासियों का दर्द इस भीड़भाड़ में और गहरा हो जाता है। स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे, लाठी के सहारे चलने वाले बुजुर्ग और रोजमर्रा के कार्यों के लिए निकली महिलाएं इस अव्यवस्था की सबसे बड़ी शिकार हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या दमकल जैसे वाहनों को भी रास्ता नहीं मिल पाता, जिससे किसी बड़ी अनहोनी का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। स्थानीय प्रशासन और नगरपालिका की कार्यप्रणाली भी इस मामले में सवालों के घेरे में है। हालांकि, नगरपालिका द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर खानापूर्ति की जाती है, लेकिन यह कार्रवाई केवल दिखावा साबित हो रही है। जैसे ही प्रशासन का दस्ता नजरों से ओझल होता है, दुकानदार पुनः सड़कों पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लेते हैं।
कस्बेवासियों ने अब प्रशासन के प्रति कड़ा रोष प्रकट करते हुए नियमित और सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक प्रशासन ठोस नीति बनाकर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम नहीं उठाएगा, तब तक बयाना को इस जाम की समस्या से मुक्ति नहीं मिल पाएगी। बयाना की यह स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, जहां अब यह देखना होगा कि क्या आमजन को राहत मिलेगी या फिर बयाना की जनता इसी तरह जाम के शोर और धुएं में अपना दम घोटती रहेगी।

Devisingh Prajapat, Bharatpur
नाम: देवीसिंह प्रजापत
कार्यक्षेत्र: बयाना उपखंड / उप जिला बयाना (राजस्थान)
अनुभव: 15 वर्ष
बीट (मुख्य विषय): सर्वपक्षीय समाचार (सभी तरह की खबरें और ग्राउंड रिपोर्टिंग)
परिचय
देवीसिंह प्रजापत राजस्थान के बयाना उपखंड क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी, निष्पक्ष और सक्रिय पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से उप जिला बयाना और संपूर्ण बयाना उपखंड की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर रखते हैं। स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं, विकास कार्यों से लेकर क्षेत्र की हर प्रमुख हलचल और सभी तरह की खबरों को प्रमुखता व प्रामाणिकता के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का व्यापक अनुभव (Work Experience)
देवीसिंह प्रजापत जी को मीडिया जगत का एक लंबा और समृद्ध अनुभव है। वह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। इस डेढ़ दशक के सफर में उन्होंने मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (प्रिंट, डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) पर काम किया है, जिससे उन्हें ग्राउंड रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय मुद्दों की गहरी समझ है।
शैक्षणिक योग्यता
देवीसिंह प्रजापत जी शैक्षणिक रूप से बेहद सुदृढ़ हैं। उन्होंने विज्ञान स्नातक (B.Sc.) के साथ-साथ बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (B.E.) की डिग्री हासिल की है। उनकी यह तकनीकी और तार्किक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों के विश्लेषण, तथ्यों की जांच और समसामयिक मुद्दों को एक वैज्ञानिक व सटीक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।
