रियासत कालीन बावड़ी का अस्तित्व खतरे में, उपेक्षा से जर्जर हो रही ऐतिहासिक धरोहर
भुसावर उपखंड के ग्राम बल्लभगढ़ में महाराजा सूरजमल द्वारा रियासत काल में निर्मित चार मंजिली बावड़ी जर्जर स्थिति में पहुंच गई है। राज्य सरकार और ग्राम पंचायत की उपेक्षा से ऐतिहासिक जल संग्रहण धरोहर संकट में है। विशेषज्ञ संरक्षण और जीर्णोद्धार की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

भुसावर। राजस्थान सरकार के जल संरक्षण अभियान के बीच, वैर विधान सभा सर्किल के भुसावर उपखंड में स्थित रियासत कालीन बावड़ी अपनी भव्यता खोती नजर आ रही है। ग्राम पंचायत बल्लभगढ़ में महाराजा सूरजमल के समय निर्मित यह चार मंजिली बावड़ी, अपनी कला कौशल और वास्तुशास्त्र के अद्वितीय नमूने के बावजूद, वर्तमान में उपेक्षा और देखरेख की कमी के चलते जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी है।
इस बावड़ी का निर्माण त्रिकूट पहाड़ी पर किया गया था, जहां एक किला और आसपास की भूमि पर वर्षा जल का संग्रहण करने के लिए पचास सीढ़ियों वाली बावड़ी बनाई गई थी। रियासत काल में इस बावड़ी का पानी पीने, नहाने-धोने और सिंचाई के लिए नियमित रूप से उपयोग किया जाता था। बावड़ी के चारों ओर बने कमरे, जल निकासी के लिए नालियां और पास की छतरियां उस समय की वास्तुकला और शाही जीवन शैली की झलक पेश करती हैं।
हालांकि आज स्थिति बदल चुकी है। बावड़ी में कंटीली झाड़ियां उग आई हैं, पानी का स्तर गिर गया है और यह जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि बावड़ी का अस्तित्व अब केवल जुआरियों और समाज कंटक के कारण संकट में है। कभी चार मंजिल तक भरने वाला यह जलाशय अब केवल ऐतिहासिक धरोहर के रूप में ही मौजूद है। बावड़ी के ऊपर स्थित अखाड़ा और मंदिर की देखभाल भी अर्द्ध-निर्मित और विवादित परिस्थितियों के कारण ठप पड़ी है।
ग्राम पंचायत सरपंच प्रतिनिधि दिलीप मीना ने बताया कि यह बावड़ी राजा महाराजाओं के समय की बनी हुई है और पास की सलेमपुर कला में महाराजा सूरजमल की ससुराल स्थित थी। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस ऐतिहासिक धरोहर की जीर्णोद्धार कर उसे पुनः जल संचयन और संरक्षण के कार्य में लाया जाए।
राजस्थान सरकार की अनदेखी और ग्राम पंचायत की अपर्याप्त देखभाल के कारण यह रियासत कालीन धरोहर अब न केवल जल संरक्षण के कार्य में अप्रयुक्त है, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी खतरे में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस बावड़ी का संरक्षण नहीं किया गया, तो यह ऐतिहासिक विरासत नष्ट होने की कगार पर पहुँच सकती है।
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Pratahkal Bureau
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