भरतपुर के आसमान में दिखी मुख्यमंत्री की नई पहल: एमएसजे कॉलेज मैदान पर पतंगों के पेच और सांस्कृतिक उल्लास का महासंगम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर भरतपुर के एमएसजे कॉलेज मैदान में ऐतिहासिक पतंगोत्सव का आयोजन किया गया। जिला कलक्टर कमर चौधरी और अन्य उच्च अधिकारियों सहित जनप्रतिनिधियों ने पतंगें उड़ाकर मकर संक्रांति मनाई। लोकगीतों और सतरंगी पतंगों के बीच आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसने जिले की सांस्कृतिक परंपराओं को एक नई ऊंचाई दी।

भरतपुर। लोहागढ़ की ऐतिहासिक धरा पर बुधवार को मकर संक्रांति का पर्व एक नए और भव्य स्वरूप में अवतरित हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की विशेष पहल पर संभाग मुख्यालय भरतपुर में पहली बार आयोजित 'पतंगोत्सव' ने न केवल आसमान को सतरंगी रंगों से सराबोर कर दिया, बल्कि एमएसजे कॉलेज के विस्तृत मैदान को उत्साह, उमंग और लोकगीतों की मधुर धुनों से गुंजायमान कर दिया। यह आयोजन केवल एक खेल नहीं, बल्कि राजस्थान की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पीढ़ी और सैलानियों से जोड़ने का एक सशक्त सेतु बनकर उभरा।
जैसे ही उत्सव का आगाज हुआ, मैदान में मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के हाथ में डोर की चरखी आते ही माहौल में एक अलग ही जोश भर गया। जिला कलक्टर कमर चौधरी, बीडीए आयुक्त कनिष्क कटारिया और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मृदुल सिंह ने सधे हुए हाथों से पतंगों को आसमान की गहराइयों में भेजकर इस महोत्सव की औपचारिक शुरुआत की। जिला कलक्टर ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मकर संक्रांति भारत की एकता का प्रतीक है, जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में लोहड़ी और पोंगल जैसे नामों से मनाया जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री की इस पहल को सराहते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से हमारी सांस्कृतिक जड़ें मजबूत होती हैं और बसंत के आगमन का स्वागत करने का इससे सुंदर तरीका और कोई नहीं हो सकता।
पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक संजय जौहरी ने इस उत्सव के पीछे के विजन को स्पष्ट करते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं और पर्यटकों को हमारी पारंपरिक धरोहर से रूबरू कराना है। उत्सव के दौरान मैदान पर तिल के लड्डुओं का वितरण कर पारंपरिक मिठास घोली गई। पतंगबाजी की इस रोमांचक स्पर्धा में सहायक पुलिस अधीक्षक पंकज यादव, प्रशिक्षु आईएएस भानू शर्मा, अतिरिक्त आबकारी आयुक्त राजीव शर्मा और सहायक निदेशक लोक सेवाएं भारती भारद्वाज ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। वहीं उपखंड अधिकारी भारती गुप्ता, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शंकरलाल और संयुक्त निदेशक पशुपालन रामकिशन महावर ने भी आकाश में पतंगों के पेच लड़ाकर अपनी खेल भावना का परिचय दिया।
महोत्सव में उपनिदेशक उद्यानिकी जनकराज मीणा के साथ-साथ गणमान्य नागरिक शैलेष कौशिक, सत्येन्द्र गोयल, गिरधारी गुप्ता और क्षेत्र के प्रमुख उद्यमियों ने भी शिरकत की। जहाँ एक ओर प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि पतंगों के पेंच लड़ाने में व्यस्त थे, वहीं दूसरी ओर बच्चों और युवाओं की टोलियां कटी हुई पतंगों को लूटने और ऊंचे स्वर में गीतों का आनंद लेने में मगन दिखीं। इस भव्य आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक उल्लास और परंपराओं का संरक्षण ही किसी भी समाज की जीवंतता का आधार है। ढलती शाम के साथ जब पतंगें आसमान से उतरीं, तो हर चेहरे पर एक नई ऊर्जा और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव स्पष्ट झलक रहा था।

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