सरसैना में वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल का 262वां बलिदान दिवस श्रद्धा और गौरव के साथ मनाया गया
सरसैना में बाबा फतेह सिंह स्मारक पर वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल का 262वां बलिदान दिवस श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। भव्य शोभायात्रा, पुष्पांजलि और सभा के माध्यम से उनके शौर्य, सुशासन और लोहागढ़ किले की ऐतिहासिक वीरता को याद किया गया।

हलैना। ग्राम सरसैना में 25 दिसंबर को इतिहास के अमर नायक वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल के 262वें बलिदान दिवस का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, गौरव और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन बाबा फतेह सिंह स्मारक परिसर में महाराजा सूरजमल विकास मंच एवं नवयुवक मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीणों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।
कार्यक्रम की शुरुआत युगपुरुष महाराजा सूरजमल के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इसके उपरांत पूरे गांव में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर अपने महान नायक को श्रद्धांजलि अर्पित की। शोभायात्रा के दौरान वातावरण देशभक्ति और शौर्य की भावना से ओतप्रोत रहा।
सभा को संबोधित करते हुए महाराजा सूरजमल विकास मंच के अध्यक्ष राजवीर सरसैना ने महाराजा सूरजमल के जीवन और संघर्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाराजा सूरजमल केवल जाट समाज के ही नहीं, बल्कि सभी वर्गों के हितैषी और आदर्श शासक थे। गरीबों, कमजोरों और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष करते हुए उन्होंने वीरगति प्राप्त की। इतिहास के अनुसार उन्होंने लगभग 80 युद्ध लड़े और कभी पराजय का सामना नहीं किया, जिससे उनकी वीरता की गाथाएँ आज भी स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हैं।
राजवीर सरसैना ने यह भी कहा कि महाराजा सूरजमल एक पराक्रमी योद्धा होने के साथ-साथ दूरदर्शी और कुशल प्रशासक थे। इतिहास में उन्हें ‘एशिया का प्लूटो’ कहा गया है। भरतपुर का विश्वप्रसिद्ध लोहागढ़ किला उनकी रणनीतिक सूझबूझ और अद्वितीय स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है। अंग्रेजों और मुगलों द्वारा 13 बार आक्रमण किए जाने के बावजूद यह किला आज भी उनकी अपराजेयता का प्रतीक बना हुआ है।
कार्यक्रम में महाराजा सूरजमल विकास मंच के अध्यक्ष राजवीर सरसैना के साथ सहकारी समिति डाइरेक्टर केशव ओरिया, बच्चू सिंह, दीवान सिंह, वीरेंद्र सरसैना, महिला कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष कुसुम हरेंद्र सरसैना, उदयवीर, श्याम फौजदार, किशनू फौजदार, मानू फौजदार, नवीन, उमाशंकर, राहुल अट्टा, पुष्पेंद्र कुंतल, राजदेव, गोपाल, जितेंद, पुष्पेंद्र, राम फौजदार, यदुवीर कुंतल, जय सिंह, अमित, हेमेंद्र और बदन ठाकुर सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
समारोह का समापन महाराजा सूरजमल के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने और उनकी विरासत को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के संकल्प के साथ किया गया। यह आयोजन न केवल इतिहास के महान नायक को श्रद्धांजलि था, बल्कि समाज में एकता, साहस और न्याय के मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश भी देता है।
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