भरतपुर कलेक्ट्रेट के बाहर उभरा शिक्षकों का आक्रोश: बेसिक वेतन बढ़ाने और समायोजन की मांग पर गूंजा आन्दोलन
भरतपुर कलेक्ट्रेट के बाहर राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय गेस्ट-लेक्चरर संघ ने बेसिक वेतन बढ़ाने और हरियाणा, पंजाब व दिल्ली की तर्ज पर समायोजन की मांग को लेकर जोरदार धरना दिया। अतिथि शिक्षकों ने ज्ञापन सौंपते हुए वेतन कटौती का विरोध किया और UGC नॉर्म्स के अनुरूप 57,700 रुपये वेतन लागू करने की मांग उठाई।

भरतपुर में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर उस समय शिक्षक आंदोलन के रंग में रंग गया, जब राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय गेस्ट-लेक्चरर संघ के सदस्य बड़ी संख्या में जुटकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करने लगे। संघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए बेसिक वेतन बढ़ाने और हरियाणा, पंजाब व दिल्ली की तर्ज पर समायोजन की मांग को लेकर विरोध दर्ज कराया। धरना स्थल पर उठी नाराजगी न केवल वेतन कटौती पर केंद्रित थी बल्कि शिक्षकों की पांच वर्षों की निरंतर सेवाओं के बावजूद असुरक्षित स्थिति को लेकर भी थी।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. केसरीमल निनामा ने बताया कि वर्ष 2021 में विद्या संबल योजना के अंतर्गत करीब 2500 सहायक आचार्यों का चयन किया गया था, जो UGC रूल्स एवं रेगुलेशन 2018 के अनुसार नियुक्त हुए थे। चयन के समय राज्य सरकार द्वारा 45 हजार रुपये बेसिक वेतन निर्धारित किया गया था, लेकिन 2023 में इसे घटाकर 40 हजार रुपये कर दिया गया। निनामा ने कहा कि यह कटौती उनके जीवन-यापन और सेवा सम्मान दोनों पर सीधा प्रहार है।
अतिथि शिक्षकों ने आरोप लगाया कि वे पिछले पांच वर्षों से लगातार महाविद्यालयों की शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्था संभाल रहे हैं। कई कॉलेजों में न प्रिंसिपल मौजूद है, न सफाई कर्मचारी और न ही प्रशासनिक स्टाफ, फिर भी पूरे संचालन की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा हाल ही में खोले गए 371 कॉलेज विद्या संबल योजना पर आधारित हैं, जिनमें करीब तीन हजार शिक्षक कार्यरत हैं, पर नई नीतियों के कारण उन्हें लगातार असमंजस और असुरक्षा की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
संघ का कहना है कि UGC नॉर्म्स के अनुसार उन्हें 57,700 रुपये बेसिक वेतन मिलना चाहिए, जबकि वर्तमान वेतन न तो उनके कार्यभार के अनुरूप है और न ही अन्य राज्यों की व्यवस्था के समान। अतिथि शिक्षकों ने राजस्थान सरकार से आग्रह किया कि उन्हें हरियाणा, दिल्ली और पंजाब की तर्ज पर समायोजित किया जाए, ताकि उनकी सेवा स्थिरता और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सकें।
धरने का समापन इस चेतावनी के साथ हुआ कि यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। शिक्षकों का यह विरोध प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था और नीतिगत निर्णयों पर गहरा प्रभाव छोड़ सकता है।
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Pratahkal Bureau
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