बयाना कस्बे में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक आमजन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। कस्बे की तंग गलियों से लेकर रिहायशी इलाकों तक कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे खासकर स्कूली बच्चे और बुजुर्ग भय के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं।

स्थानीय जानकारी के अनुसार, बयाना की जैन गली क्षेत्र में बीते एक माह के भीतर करीब एक दर्जन से अधिक लोगों को आवारा कुत्तों ने काट लिया है। अचानक होने वाले इन हमलों से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। जैन गली निवासी ज्वाला शर्मा और नीरज शर्मा ने बताया कि वे स्वयं भी कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं, जिसके बाद उन्हें तत्काल एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पड़े। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुत्ते आए दिन राह चलते लोगों पर झपट्टा मार देते हैं, जिससे लोगों का घर से निकलना भी मुश्किल हो गया है।

सबसे अधिक संकट स्कूली बच्चों को झेलना पड़ रहा है। सुबह-सुबह जैसे ही बच्चे नहाकर स्कूल जाने के लिए घर से बाहर निकलते हैं, कुत्ते उनके पीछे दौड़ पड़ते हैं। इस डर के चलते कई अभिभावकों को मजबूरन बच्चों को स्कूल तक छोड़ने और वापस लाने की जिम्मेदारी स्वयं निभानी पड़ रही है। यहां तक कि घर के समीप स्थित विद्यालयों में भी बच्चों को अकेले भेजने में परिजन असहज महसूस कर रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों ने इस गंभीर समस्या को लेकर बयाना नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और हमलों को लेकर कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इस उदासीनता के चलते क्षेत्रवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों की तत्काल धरपकड़ कर उनके लिए उचित व्यवस्था की जाए, ताकि आमजन, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को इस भयावह स्थिति से राहत मिल सके। बयाना में बढ़ता यह खतरा न केवल सार्वजनिक सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है, बल्कि नगर प्रशासन की जिम्मेदारियों की भी सख्त परीक्षा ले रहा है।

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