शुक्र उदय होने से शुरू हुए शुभ मांगलिक कार्य और अंग्रेजी नववर्ष 2026 में 59 दिन का होगा ज्येष्ठ का महीना।


शुक्र उदय और मांगलिक कार्यों पर लगी रोक का अंत

भुसावर, 31 जनवरी को शुक्र उदित होने के साथ विवाह और मंगलाचार्य आदि कामों पर लगा ब्रेक हट गया है। जिस तरह गुरु ग्रह को विवाह के लिए अनुकूल ग्रह माना जाता है, वैसे ही शुक्र को भी सुख, वैवाहिक जीवन और भोग विलास का कारक माना जाता है। शुक्र तारा अस्त होने के कारण विवाह मुहूर्त, मुण्डन, ग्रह प्रवेश, घर की नींव और सगाई जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।


ज्योतिषीय गणना और शुक्र का महत्व

विद्वान पण्डितो के अनुसार एक फरवरी को शुक्र ग्रह मकर राशि में उदय होने पर मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। हालांकि जनवरी में बसन्त पंचमी पर काफी शादियां ज़रूर हुई है।

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार 11 दिसम्बर 2025 से शुक्र तारा अस्त हुआ था। शास्त्रों में शुक्र के महत्व पर विद्वानों का कहना है कि:

"हिन्दू शास्त्रों में शुक्र को विवाह, प्रेम, सौन्दर्य, दाम्पत्य जीवन और भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। जब शुक्र अस्त होता है, तब उसकी शुभ ऊर्जा क्षीण मान ली जाती है। इसी कारण विवाह, सगाई, उपनयन और नए दाम्पत्य जीवन की शुरुआत पर रोक लग जाती है।"

विवाह मुहूर्त विवरण: फरवरी से दिसम्बर 2026

शुक्र के उदित होने के बाद चार फरवरी से शुभ मुहूर्त शुरू होंगे, जहाँ कुल 81 दिन शहनाई बजेगी:

  • फरवरी से जुलाई तक: करीब 63 विवाह मुहूर्त।
  • नवम्बर-दिसम्बर माह में: केवल 18 विवाह मुहूर्त।

वर्ष 2026 की विशेष खगोलीय स्थितियाँ और अधिक मास

विद्वान पण्डित पुष्पेन्द्र मिश्रा, खुशीराम शर्मा आदि ने विशेष जानकारी साझा की है:

  • "अब की बार करीब आठ वर्ष बाद 2026 में 59 दिन का ज्येष्ठ का महीना रहेगा।"
  • "जहाँ अधिक मास 17 मई से 15 जून तक अधिक मास रहेगा।"
  • "इसके बाद 25 जुलाई से 20 नवम्बर के बीच चातुर्मास में भगवान श्री हरि विष्णु जी चार माह के योग निद्रा में चलें जाएंगे।"
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Pratahkal Newsroom

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