भरतपुर। शहर के व्यस्ततम सारस चौराहे पर जिला प्रशासन द्वारा दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लगाए गए डिवाइडर अब आमजन के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद विजय नगर कॉलोनी समेत आसपास के हजारों लोगों को प्रतिदिन दो किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। समाधान के लिए किए गए कई प्रयास विफल रहने पर आखिरकार नागरिकों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सारस चौराहा वर्ष 2006 से शहर के मुख्य आवागमन मार्गों में से एक रहा है। यहां से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने 5 नवंबर 2025 को इस मार्ग पर बड़े-बड़े डिवाइडर लगाकर रास्ता बंद कर दिया। प्रशासन का दावा था कि यह कदम सड़क हादसों में कमी लाने के लिए आवश्यक है। हालांकि, इस निर्णय से स्थानीय लोगों को भारी असुविधा झेलनी पड़ रही है।

विजय नगर कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक फ्लाईओवर निर्माण जैसी स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। स्कूली बच्चों, कर्मचारियों और बुजुर्गों को रोजाना लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। कई बार एम्बुलेंस जैसी आपात सेवाओं को भी देर का सामना करना पड़ता है।

नागरिकों ने पहले जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर रास्ता खोलने की मांग की थी, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो विजय नगर निवासी जोगेंद्र सिनसिनवार ने सिविल न्यायालय में एक तहरीर दाखिल की है। इसमें राजस्थान सरकार, जिला कलेक्टर और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (दौसा) को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि प्रशासन की इस कार्रवाई से आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और रोजाना दुर्घटनाओं की संभावना बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा स्थायी समाधान निकाले, जिससे हादसे भी न हों और नागरिकों को भी राहत मिले। अब देखना यह होगा कि इस मामले में न्यायालय क्या फैसला सुनाता है — लोगों को राहत मिलेगी या प्रशासनिक निर्णय बरकरार रहेगा।

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Pratahkal Bureau

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