डीग के आदर्श विद्या मंदिर में सप्तशक्ति संगम व मातृ सम्मेलन, महिलाओं की भूमिका पर हुआ सारगर्भित मंथन
डीग के आदर्श विद्या मंदिर, लाला वाले कुंड में आरएसएस शताब्दी वर्ष पर आयोजित सप्तशक्ति संगम एवं मातृ सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण, पंच परिवर्तन, डिजिटल युग की चुनौतियों और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर गहन चर्चा हुई। प्रमुख वक्ताओं ने महिलाओं की सात शक्तियों और परिवार में उनकी केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया।

डीग, 18 नवंबर। विद्या भारती द्वारा संचालित माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर, लाला वाले कुंड, डीग में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित सप्तशक्ति संगम एवं मातृ सम्मेलन ने महिलाओं की भूमिका, सामुदायिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर गहन विमर्श का सशक्त मंच प्रदान किया। विद्यालय परिसर में हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत परंपरागत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
मुख्य अतिथि अंजलि गांधी ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिला ही परिवार की वास्तविक धुरी होती है और उसे स्वयं को कभी भी कमजोर नहीं समझना चाहिए। उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर के प्रेरक जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उन्होंने न्याय, सुशासन, सांस्कृतिक पुनर्निर्माण और सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए। देशभर में अनेक मंदिरों के निर्माण से लेकर आक्रमणकारियों के विरुद्ध सेना का नेतृत्व करने तक, अहिल्याबाई का जीवन महिलाओं की अदम्य शक्ति का प्रतीक है, इसी कारण वे लोकमाता के रूप में पूजनीय हैं।
मुख्य वक्ता सुनीता शर्मा ने समाज में पंच परिवर्तन—सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व-ज्ञान और कर्तव्य-बोध—के पालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाओं में निहित सात शक्तियों—कीर्ति, श्री, वाणी, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा—को जागृत कर समाज को मजबूत दिशा दी जा सकती है।
विशिष्ट अतिथि पूजा शर्मा ने आधुनिक भारत के विकास में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग अवसरों और चुनौतियों—दोनों का संगम है, इसलिए प्रत्येक महिला को इंटरनेट का विवेकपूर्ण और सुरक्षित उपयोग सीखने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्ष उर्मिला वैष्णव ने संयुक्त परिवार व्यवस्था के प्रति महिलाओं के दायित्व और कर्तव्य-बोध पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि परिवार की एकता और संस्कारों की निरंतरता में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
सम्मेलन के समापन पर विद्यालय सदस्य प्रियंका चौधरी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की संयोजिका लक्ष्मी शर्मा रहीं तथा संचालन विद्यालय की आचार्या अनीता ने किया। इस अवसर पर आशा शर्मा, बबीता, वर्षा, कीर्ति, दीप्ति, श्रीदत्त शर्मा, प्राची, तनु, मीनू, भारती, नीलम सहित अनेक महिलाओं ने सहभागिता दर्ज कर सम्मेलन की गरिमा को और बढ़ाया।
यह आयोजन न केवल महिला सशक्तिकरण के विविध आयामों पर केंद्रित रहा, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का भी प्रेरणास्रोत बना।
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