डीग, 2 दिसंबर। जिले के प्राचीन आदि बद्री धाम में चल रहे श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में आज व्यासपीठ पर विराजमान भागवताचार्य वृंदावन कालीदय के पूज्य डॉ. सन्तोष दास जी महाराज ने महारास और रुक्मिणी कथा का मार्मिक वर्णन करते हुए भक्तों को भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति का संदेश दिया।

अपने प्रवचन में सन्तोष दास जी महाराज ने कहा कि “आत्मा का परमात्मा से प्रेम होने पर ही रास होता है।” उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जीवन में सत्संग और भगवान की भक्ति को स्थान देने से ही आत्मिक आनंद की अनुभूति संभव है। उनके शब्दों ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदयों में भक्ति की गहराई और आध्यात्मिक अनुभव को जागृत किया।

इस अवसर पर गुर्जर महासभा के जिलाध्यक्ष परमिंदर गुर्जर सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे, जिन्होंने कथा के दौरान दिव्य वातावरण का अनुभव किया। आध्यात्मिक महोत्सव में उपस्थित लोगों ने भगवान के प्रति अपने प्रेम और भक्ति का भाव व्यक्त करते हुए कथा का आनंद लिया।

आदि बद्री धाम में चल रही यह श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जिले में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम बन रही है।

Pratahkal Bureau

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