राकेश गुर्जर का कोटा विश्वविद्यालय में पीएचडी हेतु चयन, सातवीं मेरिट हासिल की
बयाना के सरकारी शिक्षक राकेश गुर्जर ने हिंदी साहित्य शोध में पाई सफलता, 2000 से अधिक स्वरचित दोहा चौपाइयों से इंटरव्यू बोर्ड को किया प्रभावित।

बयाना के गल्ले नगला निवासी और सरकारी अध्यापक कवि राकेश गुर्जर, जिनका कोटा विश्वविद्यालय में 'तुलसीकृत श्री रामचरित मानस' शोध विषय पर पीएचडी हेतु सातवीं मेरिट में चयन हुआ है।
बयाना के डांग क्षेत्र की काँमर घार के छोटे से गांव गल्ले नगला में जन्मे कवि राकेश गुर्जर का कोटा विश्वविद्यालय में पीएचडी हेतु चयन हुआ है। उन्होंने हिंदी साहित्य के अंतर्गत "तुलसीकृत श्री रामचरित मानस में निहित मानव जीवन के उच्चादर्श एवं उनकी वर्तमान प्रासंगिकता - एक विश्लेषणात्मक अध्ययन" शोध विषय पर सातवीं मेरिट हासिल कर अपने क्षेत्र का मान बढ़ाया है।
इंटरव्यू में मौलिक रचनाओं का प्रभाव
कवि राकेश गुर्जर ने बताया कि वह तीन बार हिंदी साहित्य में नेट उत्तीर्ण हैं। पीएचडी इंटरव्यू के दौरान उन्होंने रामनाम महिमा पर स्वरचित मौलिक एवं मानस शैली में दोहा चौपाईयों का लगभग 10 मिनिट तक सस्वर वाचन किया। जब उन्होंने बोर्ड को अपनी स्वरचित मौलिक 2000+ दोहा चौपाईयों के बारे में बताया तो इंटरव्यू बोर्ड बहुत प्रभावित हुआ, जिस कारण ही उनका यह चयन सुनिश्चित हुआ है। कवि राकेश गुर्जर का अध्ययन के प्रति 42 साल की अवस्था में भी ऐसा जुनून है जो एक युवा में भी मुश्किल से मिल पाता है।
साहित्यिक उपलब्धियां एवं रचनाएँ
वह कवि और साहित्यार के रूप में डाइट भरतपुर की वार्षिक पत्रिका 'कलवर', 'देववाणी' पत्रिका सहित अनेक पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर लिखते रहे हैं। इसके साथ ही वह 'चातक की प्यास' और 'तिनकों का सफर' सहित अनेक काव्य संग्रहों में भी अपनी लेखनी चला चुके हैं। भक्ति साहित्य में गहरी रुचि होने के कारण वह हनुमान चालीसा की तर्ज पर 'श्री हनुमान शतक' एवं रामचरित मानस की तर्ज पर 'नव श्री रामचरित मानस' लिखने में बड़ी शिद्दत से लगे हुए हैं, जिसमें वह अब तक 2000+ दोहा चौपाईयाँ लिख चुके हैं। वह इन रचनाओं को शीघ्र प्रकाशित करवाने हेतु प्रयासरत हैं और मंचों से भी काव्यपाठ करते रहे हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक संघर्ष
पेशे से सरकारी अध्यापक राकेश गुर्जर वर्तमान में बयाना के पुराबाईखेड़ा गांव में पदस्थापित हैं। उनके पिता किसान एवं माता गृहणी हैं। वह गृह राज्य मंत्री श्री जवाहर सिंह बेढम के चाचा जी के दामाद हैं। 2012 में सरकारी अध्यापक बनने के बाद भी उनका अध्ययन अनवरत जारी है, जिसके सुखद परिणाम स्वरूप उन्होंने पिछले साल RPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में हिंदी साहित्य से इंटरव्यू तक का सफर तय किया और इस साल भी वह RAS 2024 भर्ती में इंटरव्यू दे रहे हैं।
अध्ययन के प्रति अटूट समर्पण
अध्ययन के प्रति उनका लगाव इतना गहरा है कि "जब तक वह विद्यालय ड्यूटी के बाद रोज 6 घंटे अध्ययन नहीं कर लेते उनको सुकून नहीं मिलता।" उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि संपूर्ण डांग क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।

Devisingh Prajapat, Bharatpur
नाम: देवीसिंह प्रजापत
कार्यक्षेत्र: बयाना उपखंड / उप जिला बयाना (राजस्थान)
अनुभव: 15 वर्ष
बीट (मुख्य विषय): सर्वपक्षीय समाचार (सभी तरह की खबरें और ग्राउंड रिपोर्टिंग)
परिचय
देवीसिंह प्रजापत राजस्थान के बयाना उपखंड क्षेत्र के एक अत्यंत अनुभवी, निष्पक्ष और सक्रिय पत्रकार हैं। वह मुख्य रूप से उप जिला बयाना और संपूर्ण बयाना उपखंड की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर पैनी नजर रखते हैं। स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं, विकास कार्यों से लेकर क्षेत्र की हर प्रमुख हलचल और सभी तरह की खबरों को प्रमुखता व प्रामाणिकता के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का व्यापक अनुभव (Work Experience)
देवीसिंह प्रजापत जी को मीडिया जगत का एक लंबा और समृद्ध अनुभव है। वह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। इस डेढ़ दशक के सफर में उन्होंने मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (प्रिंट, डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) पर काम किया है, जिससे उन्हें ग्राउंड रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय मुद्दों की गहरी समझ है।
शैक्षणिक योग्यता
देवीसिंह प्रजापत जी शैक्षणिक रूप से बेहद सुदृढ़ हैं। उन्होंने विज्ञान स्नातक (B.Sc.) के साथ-साथ बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (B.E.) की डिग्री हासिल की है। उनकी यह तकनीकी और तार्किक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों के विश्लेषण, तथ्यों की जांच और समसामयिक मुद्दों को एक वैज्ञानिक व सटीक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में सक्षम बनाती है।
