राजस्थान में ग्रीष्मकालीन अवकाश कटौती को लेकर शिक्षक वर्ग का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। गर्मियों की छुट्टियां नजदीक आने के साथ ही शिक्षकों में असमंजस और नाराजगी गहराती जा रही है, क्योंकि लगातार विरोध के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक ग्रीष्मावकाश कटौती का आदेश वापस नहीं लिया है। परंपरागत रूप से चले आ रहे अवकाश में कटौती को लेकर शिक्षकों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के ब्लॉक अध्यक्ष बृजकिशोर शर्मा ने कहा कि सरकार ने शिक्षक संगठनों से बिना किसी वार्ता के अलोकतांत्रिक तरीके से ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती की है, जिससे पूरे शिक्षक वर्ग में भारी असंतोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि राजस्थान की प्राकृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए वर्षों से 16 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया जाता रहा है। इसी अवधि में दूर-दराज क्षेत्रों में कार्यरत लाखों शिक्षक अपने घर लौटकर पारिवारिक, सामाजिक और घरेलू दायित्वों का निर्वहन करते हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों के लिए यह अवकाश केवल विश्राम का समय नहीं होता, बल्कि मकान मरम्मत, बच्चों की पढ़ाई और शादी की व्यवस्थाएं, जमीन-जायदाद का रखरखाव, वृद्ध माता-पिता की सेवा सहित अनेक आवश्यक जिम्मेदारियों को पूरा करने का अवसर भी होता है। ऐसे में सरकार द्वारा की गई ग्रीष्मावकाश कटौती को शिक्षक हितों पर सीधा कुठाराघात माना जा रहा है, जिससे शिक्षक वर्ग चिंतित और परेशान है।

बृजकिशोर शर्मा ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से शीघ्र शिक्षक संगठनों के साथ वार्ता कर ग्रीष्मावकाश कटौती के आदेश को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम का विरोध पिछले एक माह से लगातार जारी है और इस मुद्दे पर आंदोलन के तीन चरण पूरे किए जा चुके हैं। इसी क्रम में गत सप्ताह पूरे राजस्थान के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों पर शिक्षकों ने शांतिपूर्ण तरीके से हनुमान चालीसा पाठ और सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन कर विरोध दर्ज कराया था।

इसके बावजूद सरकार द्वारा शिविरा में संशोधन कर जारी किए गए ग्रीष्मकालीन अवकाश कटौती आदेश को वापस नहीं लिया गया है। इससे प्रदेशभर का शिक्षक वर्ग आक्रोशित है। शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो शिक्षक बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसी क्रम में 18 मई को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के विधानसभा क्षेत्र रामगंज मंडी में विशाल शिक्षक रैली आयोजित कर राजस्थान के सबसे बड़े शिक्षक आंदोलन का आगाज किया जाएगा। शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया कि आंदोलन की स्थिति बनने पर इसकी समस्त जिम्मेदारी राजस्थान सरकार की होगी।

Pratahkal Bureau

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