डीग: नगर के बुर्जा में कांग्रेस का 'चुनाव कराओ, लोकतंत्र बचाओ' हस्ताक्षर अभियान शुरू
एडवोकेट अशोक कुमार शर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पंचायत और निकाय चुनाव समय पर न कराने के विरोध में हस्ताक्षर कर संवैधानिक अधिकारों की मांग की।

नगर विधानसभा के बुर्जा गांव में 'चुनाव कराओ, लोकतंत्र बचाओ' बैनर के साथ विरोध प्रदर्शन करते प्रदेश सचिव एडवोकेट अशोक कुमार शर्मा (बाएं) और अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता।
राजस्थान में भाजपा सरकार द्वारा स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायत चुनाव समय पर न कराए जाने को लोकतंत्र और संविधान का खुला उल्लंघन करार देते हुए प्रदेश में विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। इसी क्रम में आज 8 मई को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार, राजीव गांधी पंचायतीराज विभाग राजस्थान के तत्वाधान में 'चुनाव कराओ, लोकतंत्र बचाओ' हस्ताक्षर जनअभियान का आगाज़ किया गया। नगर विधानसभा के बुर्जा गांव में आयोजित इस अभियान का नेतृत्व विभाग के प्रदेश सचिव एडवोकेट अशोक कुमार शर्मा ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों से हस्ताक्षर कराए गए और उन्हें स्थानीय निकायों के चुनावों के संबंध में संवैधानिक प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। एडवोकेट शर्मा ने गांव-गांव और कस्बों में जाकर लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं, विशेषकर राज्य निर्वाचन आयोग पर अपना अनैतिक और अवैधानिक प्रभाव डालकर लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रही है।
प्रदेश सचिव एडवोकेट अशोक कुमार शर्मा ने सार्वजनिक रूप से सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा की तानाशाही नीति के कारण प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव पिछले एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के स्थान पर प्रशासकों की नियुक्ति ने स्थानीय स्वशासन की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जो न केवल प्रशासनिक चिंता का विषय है बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों का स्पष्ट हनन भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ईडी और सीबीआई की तरह ही राज्य निर्वाचन आयोग पर भी शिकंजा कसे हुए है, जिससे न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना हो रही है। शर्मा ने संवैधानिक गरिमा का हवाला देते हुए बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 E (पंचायतों का कार्यकाल) और अनुच्छेद 243 U (नगरीय निकायों का कार्यकाल) स्पष्ट करते हैं कि 5 वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर समय पर चुनाव कराना एक बाध्यकारी दायित्व है, न कि सरकार की विवेकाधीन शक्ति। वहीं अनुच्छेद 243 K निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है।
कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 'विकास किशन राव गवली (2021)' प्रकरण में यह स्पष्ट कर दिया था कि परिसीमन या प्रशासनिक कारण चुनावों को टालने का वैध आधार नहीं हो सकते। राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने की अंतिम समय सीमा निर्धारित की थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने एसएलपी खारिज कर यथावत रखा। इसके बावजूद चुनाव न कराना न्यायपालिका का अपमान है। एडवोकेट शर्मा ने चेतावनी दी कि मत डालने और चुनाव लड़ने के अधिकार का हनन देश को तानाशाही की तरफ धकेल रहा है, जिससे 73वें और 74वें संविधान संशोधन की मूल भावना और लोकतांत्रिक जवाबदेही खत्म हो रही है। उन्होंने विश्व इतिहास के तानाशाहों एडॉल्फ हिटलर और बेनिटो मुसोलिनी के पतन का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकतंत्र विरोधी शक्तियों का अंत निश्चित है। इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रताप सिंह नौगावा और हेमेंद्र सिंह सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।

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