बयाना (भरतपुर)। राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित बंध बारैठा वन्यजीव अभ्यारण्य के नजदीकी ग्रामीण इलाकों में इन दिनों दहशत का साया मंडरा रहा है। सोमवार की सुबह बयाना क्षेत्र उस वक्त सिहर उठा, जब एक विशालकाय लेपर्ड रिहायशी खेतों के बिल्कुल करीब देखा गया। सरसों की ऊंची फसलों के बीच घात लगाकर बैठे इस शिकारी वन्यजीव ने न केवल राहगीरों की धड़कनें बढ़ा दीं, बल्कि वन्यजीव विभाग की सुरक्षा तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह सनसनीखेज वाकया सोमवार सुबह का है, जब बयाना के कोट गांव निवासी श्यामवीर गुर्जर अपने ट्रैक्टर के साथ घर लौट रहे थे। परौआ और कोडपुरा गांव के मध्य पहुंचते ही उनकी नजर सरसों के खेत की पाल पर पड़ी, जहां एक लेपर्ड इत्मीनान से बैठा हुआ था। अचानक जंगली जानवर को इतने करीब देख श्यामवीर ने हिम्मत दिखाते हुए अपने मोबाइल से उसका वीडियो बना लिया। कुछ देर तक लेपर्ड ट्रैक्टर की गड़गड़ाहट के बीच श्यामवीर की ओर एकटक निहारता रहा और फिर आहट पाकर पलक झपकते ही ओझल हो गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही समूचे क्षेत्र में डर का माहौल व्याप्त हो गया है और ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की गुहार लगाई है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से इस 'डांग' क्षेत्र में पैंथर की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। खेतों में काम करने वाले किसान और सड़कों से गुजरने वाले राहगीर अब असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं। विशेष रूप से ढलती शाम और रात के सन्नाटे में पैंथर का डर इस कदर हावी है कि लोगों ने अपने खेतों की ओर जाना कम कर दिया है। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।

प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले खेतों में न जाएं और रात के समय बाहर निकलते समय अत्यधिक सावधानी बरतें। साथ ही, मवेशियों को खुले में न छोड़ने की सलाह दी गई है। बंध बारैठा वन्यजीव अभ्यारण्य रेंज के रेंजर जितेंद्र सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि अभ्यारण्य क्षेत्र में सामान्यतः तीन से चार लेपर्ड्स का मूवमेंट रहता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि विभाग की टीम शाम के समय संबंधित क्षेत्र में गश्त करेगी और लेपर्ड की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति को टाला जा सके।

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