डीग में गरजा विपक्ष: 'मनरेगा बचाओ जनांदोलन' से भाजपा सरकार की ईंट से ईंट बजाएगी कांग्रेस, क्या खतरे में है ग्रामीणों का निवाला?
डीग जिले में कांग्रेस का 'मनरेगा बचाओ जनांदोलन' तेज हो गया है। जिलाध्यक्ष राजीव सिंह चौधरी के नेतृत्व में कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर पंचायतों की शक्तियां ठेकेदारों को सौंपने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा लागू किए गए मनरेगा को बचाने और गरीबों के हक के लिए सड़कों पर उतरे दिग्गज नेताओं की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

डीग, 24 जनवरी। राजस्थान के डीग जिले में सियासी पारा अपने चरम पर है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर और जिलाध्यक्ष राजीव सिंह चौधरी के नेतृत्व में 'मनरेगा बचाओ जनांदोलन' अब एक विशाल जन-लहर का रूप ले चुका है। गोविंद सिंह डोटासरा की मुहिम को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिले के कोने-कोने में भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की उस नींव को बचाने की जंग बन गया है जिसे कभी प्रखर अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह और श्रीमती सोनिया गांधी ने महात्मा गांधी के 'ग्राम स्वराज्य' के सपने को साकार करने के लिए रोपा था।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005, जो ग्रामीण जनशक्ति के संरचनात्मक उपयोग और अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रतीक था, आज संकट के दौर से गुजर रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि जिस कानून ने ग्रामीणों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी और रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ते का कानूनी अधिकार दिया, वर्तमान भाजपा सरकार उस रीढ़ की हड्डी को तोड़ने पर आमादा है। कांग्रेस नेताओं का स्पष्ट कहना है कि भाजपा सरकार ग्राम पंचायतों की लोकतांत्रिक शक्तियों को छीनकर उन्हें निजी ठेकेदारों के हाथों में गिरवी रखने की तैयारी कर रही है।
आंदोलन के दौरान यह गंभीर मुद्दा उठाया गया कि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति पहले से ही चिंताजनक है, जिस पर लगभग 7.50 लाख करोड़ रुपये का भारी कर्ज है। आलम यह है कि आरजीएचएस (RGHS) के तहत दवाइयों और इलाज का भुगतान नहीं हो पा रहा है और बकाया भुगतान न होने के कारण ठेकेदार आत्मघाती कदम उठाने की धमकियां दे रहे हैं। ऐसे में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ चुके हैं। एक तरफ जहां भारत सरकार का राजस्व वर्ष 2025-26 में 48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, वहीं दूसरी ओर गरीबों की थाली से निवाला छीनने की कोशिशें की जा रही हैं। कांग्रेस ने 'गरीबी हटाओ और भाजपा भगाओ' के नारे के साथ संकल्प लिया है कि वे पंचायतों के अधिकारों और मजदूरों के हितों के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इस विशाल जनांदोलन में श्वेता यादव (महिला कांग्रेस अध्यक्ष डीग), प्रेम सिंह प्रजापत (महामंत्री पर्यावरण प्रकोष्ठ), कमल सिंह गडासिया (मीडिया प्रभारी), दिनेश सिनसिनी, पूरन सिंह बडेसरा, राजकुमार कटहरा, विक्रम सिंह गदालपुर, गजराज सिंह पैंगोर, अनुराग पला, नंदकिशोर सिनसिनवार बैलारा, दुर्गेश (उपसरपंच लखन), वीरेंद्र सिंह, सुशील, दलवीर कसौट, बृजेंद्र सिंह सरपंच कसौट, दीपू वहज, विष्णु जोशी खेड़ा ब्रह्मांड, इकलहरा, प्रकाश उप प्रधान, सरपंच भीलम का बुद्धिखान, ओमी और धर्मों सरपंच इकलहरा, सोनू फौजदार (NSUI ब्लॉक अध्यक्ष कुम्हेर), पीयूष समाधियां (जिला सचिव), शिवांक फौजदार (ब्लॉक महासचिव), आशीष फौजदार (ब्लॉक महासचिव), हिमांशु मीणा (ब्लॉक महासचिव), सोहनलाल, ईश्वरी, श्रीमती अनिता, फ़रीदीन और श्रीमती हरितिका सहित भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कांग्रेस का यह आंदोलन अब डीग की गलियों से निकलकर सत्ता के गलियारों तक गूंज रहा है, जो आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत दे रहा है।

Pratahkal Bureau
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