वर्ष 2025 के अंतिम बुध प्रदोष व्रत पर भुसावर कस्बे सहित पूरे उपखण्ड क्षेत्र में शिवभक्ति का अद्भुत और भव्य दृश्य देखने को मिला। सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग के पावन संयोग में शिवालयों और देवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसरों में धार्मिक आस्था, भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा, जहां सनातन धर्मप्रेमियों ने विधि-विधान से भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य गणेश जी की आराधना कर मनोकामनाओं की अरदास लगाई।

प्रदोष व्रत के अवसर पर कस्बे के हिंडौन सड़क मार्ग स्थित प्राचीन कोठी वाले हनुमानजी मंदिर, पंचमुखी हनुमानजी मंदिर, हूंकारेश्वर महादेव मंदिर, भगतराज वाले हनुमानजी मंदिर, बड़वाले शिम्भू हनुमानजी मंदिर, अथाई वाले हनुमानजी मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर तथा बरपाड़ा कॉलोनी स्थित ब्राह्मण धर्मशाला हनुमान मंदिर परिसर सहित अन्य धार्मिक स्थलों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलन, अभिषेक और आरती के माध्यम से भगवान भोलेनाथ की आराधना की।

शाम होते ही मंदिरों में भक्ति संगीत की गूंज सुनाई देने लगी। ढोलक, झांझ और मंजीरा की थाप पर “आया हूं बाबा तेरे दरबार”, “भोलेनाथ से निराला कोई और नहीं” और “बम भोले बम” जैसे भजनों के साथ श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर नृत्य किया और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं का सजीव स्वरूप दिखाई दिया।

इस अवसर पर विद्वान पंडितों ने शास्त्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पुराणों के अनुसार त्रयोदशी तिथि की रात्रि के प्रथम भाग में श्रद्धा और भक्ति भाव से भगवान शिव के दर्शन अथवा पूजन करने से लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही प्रदोष व्रत के प्रभाव से भक्तों के जीवन में धन, सुख और सौभाग्य की वृद्धि होती है।

2025 के अंतिम बुध प्रदोष पर भुसावर में उमड़ी यह विशाल श्रद्धालु भीड़ न केवल गहरी धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि सनातन परंपराओं की निरंतरता और सामाजिक समरसता को भी सशक्त रूप से उजागर कर गई।

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