डीग। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा योजना पर मंडराते खतरों और आमजन को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करने के लिए डीग जिले में 'मनरेगा बचाओ जन आंदोलन संग्राम' का शंखनाद हो गया है। कांग्रेस कमेटी डीग के जिलाध्यक्ष राजीव सिंह चौधरी के नेतृत्व में गुरुवार को ग्राम पंचायत रारह, ताखा, गुनसारा और तालफरा के ग्रामीण अंचलों में नुक्कड़ सभाओं और चौपालों का आयोजन किया गया, जहां भारी जनसैलाब उमड़ा। इस दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए चेतावनी दी कि यदि मनरेगा के मूल ढांचे से छेड़छाड़ हुई तो यह करोड़ों परिवारों के पेट पर लात मारने जैसा होगा।

जिलाध्यक्ष राजीव सिंह चौधरी ने सभाओं को संबोधित करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मनरेगा की आत्मा को चार खतरनाक तरीकों से नष्ट करने की साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि अब मोदी सरकार तय करेगी कि किस ग्राम पंचायत को काम मिलेगा और किसे नहीं, जिससे 'काम का अधिकार' अब सरकार की मर्जी पर निर्भर एक 'रेबड़ी' बनकर रह जाएगा। चौधरी ने वित्तीय आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि केंद्र सरकार का राजस्व वर्ष 2025-26 में करीब 48 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, इसके बावजूद केंद्र अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मजदूरी भुगतान का अपना हिस्सा 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत करने की तैयारी में है। यह बोझ उन राज्य सरकारों पर डाला जा रहा है जो पहले से ही कर्ज के तले दबी हैं। राजस्थान का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य का राजस्व महज 3 लाख करोड़ है, जबकि उस पर साढ़े सात लाख करोड़ का कर्ज है, ऐसे में केंद्र का यह कदम वित्तीय अराजकता पैदा करेगा।

नुक्कड़ सभाओं में किसानों और मजदूरों की व्यथा को स्वर देते हुए कहा गया कि प्रस्तावित 60 दिन का 'ब्लैक आउट पीरियड' अन्नदाताओं की कमर तोड़ देगा। आशंका जताई गई कि भविष्य में मनरेगा में ठेकेदारी प्रथा को शामिल किया जाएगा, जिससे गरीब मजदूर मात्र 'श्रम आपूर्ति' की इकाई बनकर रह जाएंगे और रोजगार सहायकों का पद भी समाप्त कर दिया जाएगा। इस दौरान मतदाता जागरूकता पर भी बल दिया गया ताकि नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सजग रह सकें।

इस व्यापक जनसंपर्क अभियान में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की एकजुटता देखने को मिली। कार्यक्रम में जिला महिला कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती श्वेता यादव, पर्यावरण प्रकोष्ठ के महामंत्री प्रेमसिंह प्रजापति और स्वायत्त शासन प्रकोष्ठ के अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह ने प्रमुखता से भाग लिया। इनके साथ ही पिन्टू साबौरा, कमल सिंह गडासिया, अनिरूद्ध बांसरौली, रारह से रघुवीर सिंह, रामवीर सिंह सिद्धू, प्रभात सिंह, प्रेमचंद, श्यामवीर सिंह, जगदीश, बदन सिंह, हरिओम चौधरी, सोहन सिंह, रमन, दीपू बुरावई और गजराज सिंह ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

वहीं गुनसारा में आयोजित सभा के दौरान जगदीश सिंह, मानसिंह, हरवीर वकील, वीरेन्द्र महाराज, अजय सिंह सरपंच, लक्ष्मण सिंह जाटव, देवीसिंह जाटव, लाखन सिंह, दयाराम और भोला सिंह ने हुंकार भरी। तालफरा और अन्य क्षेत्रों से पुष्पेन्द्र सिंह, प्रहलाद वकील, रामू, अभौर्रा से रामवीर सिंह, श्याम सिंह तथा ताखा से हरपाल सिंह, रनवीर सिंह और निहाल सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। यह आंदोलन न केवल मनरेगा को बचाने की लड़ाई है, बल्कि ग्रामीण स्वावलंबन को अक्षुण्ण रखने का एक संकल्प बनकर उभरा है।

Pooran Prakash Bansal, Deeg

Pooran Prakash Bansal, Deeg

नाम: पूरण प्रकाश बंसल

पद: पत्रकार (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य

परिचय 

पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।

पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)

पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:

  • दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।

  • राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।

  • प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।

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