भरतपुर। जैसे ही सर्दियों का आगमन होता है, भारत के प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में हजारों प्रवासी पक्षियों ने डेरा डालना शुरू कर दिया है। यह प्राकृतिक नजारा न केवल पर्यावरण प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में प्रवासी पक्षियों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालता है।

स्थानीय वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीपक मुदगल ने इस अद्भुत दृश्य को अपने कैमरे में कैद किया, जिसमें धुंधले सुबह के वातावरण में आकाश में उड़ते हजारों पक्षियों का सामूहिक दृश्य दिखाई दे रहा है। फोटो में पिंटेल, शोवलर, बार-हेडेड गूज, कॉमन टील, ब्राह्मणी बतख, बैडर्स कोंडक और ग्रेलैग गूज के विशाल झुंड प्रमुख रूप से दिखाई दे रहे हैं। पृष्ठभूमि में सूखे पेड़ और जलभराव वाले मैदान इस दृश्य को और भी जीवंत बनाते हैं।

ये प्रवासी पक्षी मुख्य रूप से साइबेरिया, मंगोलिया और मध्य एशिया के ठंडे इलाकों से हजारों किलोमीटर की यात्रा कर केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में पहुंचते हैं। यह पार्क, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है, उन्हें नवंबर से मार्च तक रहने और विश्राम करने के लिए एक सुरक्षित आवास प्रदान करता है। सुबह के समय में पक्षियों का यह सामूहिक उड़ान अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।

केवलादेव पार्क के आसपास के जलभराव वाले क्षेत्रों में कई दिनों तक लगातार प्रयास के बाद ही इस अनमोल क्षण को कैमरे में कैद किया जा सका। इस प्रकार का दृश्य न केवल पार्क की प्राकृतिक सुंदरता को उजागर करता है, बल्कि यह संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का भी संदेश देता है।

यह घटना स्थानीय पर्यटन और पारिस्थितिकी संरक्षण के लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह दर्शाती है कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्रमुख सुरक्षित स्थल के रूप में कार्य कर रहा है।

Pratahkal Bureau

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