ट्रेनों में अवैध वेंडरिंग का बड़ा खुलासा: लाइसेंस 25 के, दौड़ रहे थे 50 वेंडर, विजिलेंस की सख्त कार्रवाई
रेलवे विजिलेंस ने ट्रेनों में अवैध वेंडरिंग के बड़े खेल का खुलासा किया है। 25 लाइसेंस के मुकाबले 50 वेंडर चलाए जा रहे थे। जांच में चार अवैध वेंडर पकड़े गए, जिन्हें आरपीएफ के हवाले किया गया। मामले में ठेकेदार की भूमिका की जांच जारी है।

बयाना। रेलवे ट्रेनों में यात्रियों को सामान बेचने के नाम पर चल रहे एक बड़े अनियमित खेल का पर्दाफाश हुआ है। रेलवे द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों को ताक पर रखकर ठेकेदार ने लाइसेंस की आड़ में अवैध वेंडरिंग का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। विजिलेंस जांच में सामने आया कि जहां रेलवे ने केवल 25 वेंडरों को ही अधिकृत लाइसेंस जारी कर रखे हैं, वहीं ट्रेनों में लगभग 50 वेंडर सक्रिय रूप से सामान बेचते पाए गए।
रेलवे विजिलेंस की टीम ने औचक जांच के दौरान चार ऐसे वेंडरों को रंगे हाथों पकड़ लिया, जो ठेकेदार द्वारा जारी किए गए पहचान पत्र के आधार पर ट्रेनों में अवैध रूप से मोबाइल एसेसरीज, ताला-चाबी, खिलौने और अन्य सामान बेच रहे थे। जांच के बाद इन वेंडरों को कोटा आरपीएफ के सुपुर्द किया गया, जहां उनके खिलाफ रेलवे नियमों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रेलवे ने अपनी राजस्व वृद्धि के उद्देश्य से ट्रेनों में कुछ चयनित वस्तुओं की बिक्री के लिए ठेका जारी किया था। ठेका शर्तों में स्पष्ट रूप से तय था कि ठेकेदार निर्धारित संख्या से अधिक वेंडरों की तैनाती नहीं कर सकता। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा लगभग दोगुनी संख्या में वेंडर चलाए जा रहे थे। बताया जा रहा है कि सभी वेंडरों को पहचान पत्र उपलब्ध कराए गए थे, जिनमें से कई पहचान पत्र फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है।
अलग-अलग ट्रेनों और मार्गों पर वेंडरों की तैनाती के कारण एक साथ सभी अवैध वेंडरों को पकड़ पाना संभव नहीं हो सका। बावजूद इसके, विजिलेंस की कार्रवाई ने इस पूरे मामले की परतें खोल दी हैं। फिलहाल जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और ठेकेदार की भूमिका की गहनता से पड़ताल की जा रही है। यह कार्रवाई रेलवे व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर एक अहम संदेश मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau
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