मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जीवन आज भी राष्ट्र के लिए प्रेरणा का एक ऐसा प्रकाश पुंज है, जो हर भारतीय को स्वाभिमान के साथ जीने का संदेश देता है। इसी महान गौरव गाथा को स्मरण करते हुए, भरतपुर के रणजीत नगर स्थित आदर्श स्कूल परिसर के महाराणा प्रताप छात्रावास में सर्व समाज महासभा द्वारा महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने वीर योद्धा के शौर्य और त्याग को न केवल नमन किया, बल्कि उनके आदर्शों को वर्तमान पीढ़ी के मानस पटल पर अंकित करने का सफल प्रयास किया।

आयोजन के दौरान वक्ताओं और साहित्यकारों ने महाराणा प्रताप के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। सर्व समाज महासभा के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघल ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ की सीमा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण राष्ट्र के गौरव हैं। उनके जीवन का संघर्ष और मातृभूमि के प्रति उनका अटूट समर्पण आज के युवाओं के लिए एक अनुकरणीय मिसाल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समाज और राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है, तो युवाओं को प्रताप के जीवन दर्शन को आत्मसात करना ही होगा।

कार्यक्रम की मुख्य धुरी काव्य गोष्ठी रही, जिसमें साहित्यकारों ने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से वीर शिरोमणि के साहस का वर्णन किया। डॉ. कृष्ण कन्हैया शर्मा, प्रियंका पुरोहित, सी.एस. कृष्णा, कवि राजीव चौधरी, कवि लोकेन्द्र सुमन, डॉ. अविनाश सैनी, गिरधारी खंडेलवाल और जीवनलाल शर्मा सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से महाराणा प्रताप के प्रति अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कविताओं में उभरे देशभक्ति के स्वर ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस गरिमामयी कार्यक्रम में धर्मवीर सिंह तुहिया, अनिल शर्मा, प्रमोद अग्रवाल, प्रेमचंद लवानिया, शिवम जिंदल, मनोज झालानी, रणजीत सिंह, देवांग सिंघल और विशाल गुप्ता सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, नागरिक, महिला कार्यकर्ता और युवा प्रतिभागी उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता इस बात का प्रमाण रही कि महाराणा प्रताप का शौर्य आज भी जनमानस में कितनी गहराई से समाया हुआ है। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि वीर शिरोमणि के आदर्शों को केवल यादों में ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन के कार्यों में भी चरितार्थ किया जाएगा, ताकि उनके बलिदान का सम्मान बना रहे।

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