भुसावर। कस्बे के मिल्की मोहल्ला सहित संपूर्ण क्षेत्र में मंगलवार की देर रात लोहड़ी का पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास और अटूट श्रद्धा के साथ मनाया गया। कड़कड़ाती ठंड के बीच जब लोहड़ी की पवित्र अग्नि प्रज्वलित हुई, तो पूरा वातावरण उत्सव के रंग में सराबोर हो गया। पंजाबी संस्कृति और स्थानीय परंपराओं के अनूठे संगम ने इस उत्सव को यादगार बना दिया, जहां नई फसल के आगमन की खुशी और आपसी भाईचारे की मिठास साफ तौर पर देखने को मिली।

कार्यक्रम का मुख्य केंद्र कस्बे का प्राचीन पंजाबी गुरुद्वारा हनुमानजी मंदिर रहा, जहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर के पुजारी राघवेंद्र शर्मा ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की। जैसे ही लोहड़ी की पवित्र अग्नि प्रज्वलित की गई, श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक उसमें तिल से बने पकवान, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी और मक्का के पॉपकॉर्न अर्पित किए। अग्नि की सात परिक्रमा कर लोहड़ी माता से परिवार की सुख-शांति और क्षेत्र की खुशहाली के लिए मन्नतें मांगी गईं।

उत्सव का उत्साह उस समय अपने चरम पर पहुंच गया जब ढोल-नगाड़ों की थाप गूंज उठी। पंजाबी समाज के युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने भांगड़ा और गिद्दा की धुनों पर थिरकते हुए अपनी खुशी का इजहार किया। आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी और फुलझड़ियों की रोशनी से जगमगा उठा। इस अवसर पर पंजाबी समाज के प्रबुद्धजनों—टिल्लाराम अरोड़ा, किशन लाल अरोड़ा, चीनी पंजाबी, गोपाल मेहंदीरत्ता, कन्हैया, किशोरी खत्री, नरेश कुमार और निन्दों पंजाबी ने पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि नई ऊर्जा और एकजुटता का प्रतीक है। विशेष रूप से जिन घरों में पुत्र का जन्म हुआ है या जहां नवविवाहित जोड़े हैं, वहां यह पर्व नई उम्मीदों और आशीषों के साथ मनाया गया। यह आयोजन कस्बे में सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता की एक अनुपम मिसाल पेश कर गया।

Pratahkal Bureau

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