बयाना में लोहड़ी की धूम: पवित्र अग्नि के फेरों और भांगड़े की थाप के साथ सिख-पंजाबी समाज ने मनाया खुशियों का पर्व
बयाना में सिख-पंजाबी समाज द्वारा लोहड़ी का पर्व पारंपरिक उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा परिसर में पवित्र अग्नि पूजन, भांगड़ा-गिद्दा नृत्य और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के बीच नवविवाहित जोड़ों और नवजातों के लिए खुशहाली की कामना की गई। ज्ञानी हरबेल सिंह और डॉ. सुरेंद्र सिंह चावला सहित समाज के गणमान्य लोग इस भव्य आयोजन के साक्षी बने।

बयाना। कड़ाके की ठंड के बीच बयाना का वातावरण मंगलवार देर शाम उस समय भक्ति और उत्साह के उल्लास से सराबोर हो उठा, जब स्थानीय सिख-पंजाबी समाज द्वारा पारंपरिक लोहड़ी पर्व का भव्य आयोजन किया गया। श्रद्धा, संस्कृति और आपसी भाईचारे के प्रतीक इस उत्सव ने गुरुद्वारा परिसर में एक अनूठी छटा बिखेरी, जहाँ समाज के लोगों ने अपनी समृद्ध विरासत को जीवंत करते हुए नई फसल और खुशहाली का स्वागत किया।
उत्सव का शुभारंभ गुरुद्वारा परिसर में आयोजित विशेष दीवान और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित संगत की मौजूदगी में अरदास की गई, जिसके पश्चात लोहड़ी की पवित्र अग्नि प्रज्ज्वलित की गई। अग्नि की उठती लपटों के बीच श्रद्धालुओं ने पारंपरिक मंगल गीत “मिट्ठे गुड़ दे विच मिल गए तिल, उड़दी पतंग दे खिल गए दिल, सुंदर मुंदरिये हो...” के मधुर स्वर गूंजाए। अपनी परंपराओं का निर्वहन करते हुए समाज के स्त्री-पुरुषों और बच्चों ने अग्नि की परिक्रमा की और उसमें तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली व पॉपकॉर्न अर्पित कर सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।
अग्नि पूजन के पश्चात उत्सव का रंग और भी गहरा हो गया जब पंजाबी लोकगीतों की धुनों पर युवाओं और बुजुर्गों ने ढोल की थाप के साथ भांगड़ा और गिद्दा नृत्य प्रस्तुत किया। ढोल की गूंज और थिरकते कदमों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। इस वर्ष की लोहड़ी उन परिवारों के लिए विशेष रही, जिनके घर हाल ही में शहनाइयां बजी थीं या नन्हे मेहमान का आगमन हुआ था। नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के परिवारों के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए, जहाँ समाज के प्रबुद्ध जनों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस गरिमामय आयोजन में गुरुद्वारा ज्ञानी हरबेल सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह चावला, पूरन सिंह चावला, इंद्रजीत मनोचा, अन्नी कक्कड़ और हैप्पी चावला सहित समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं भारी संख्या में संगत के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर सभी को प्रसाद वितरित किया गया और लोगों ने एक-दूसरे को गले लगकर पर्व की बधाई दी। बयाना में संपन्न हुआ यह लोहड़ी महोत्सव न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान रहा, बल्कि इसने सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता की एक सशक्त मिसाल भी पेश की।

Pratahkal Bureau
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