भरतपुर। सलेमपुर कलां की प्राचीन हवेली और कचहरी, जिनसे जुड़ा है महाराजा सूरजमल और उनकी पत्नी हंसिया का ऐतिहासिक नाम, अब रखरखाव की कमी के कारण खंडहर बनती जा रही हैं। भरतपुर रियासत के संस्थापक महाराजा सूरजमल, जिन्होंने रतीराम नाहर की पुत्री हंसिया से विवाह किया था, के ससुराल की यह विरासत अब समय की मार झेल रही है, और स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित विभागों की उदासीनता से धरोहर संरक्षण संकट में है।

सलेमपुर कलां के ग्रामीण बताते हैं कि रतीराम नाहर, जयपुर रियासत के महाराजा जयसिंह के विश्वसनीय मालगुजार रहे। उनकी बेटी हंसिया बचपन से ही साहसी और वीर थीं। मूक-बधिर जीव-जन्तुओं और जंगल के जानवरों के साथ उनके अनोखे खेल की बातें आज भी गांव में सुनाई जाती हैं। बताया जाता है कि महाराजा सूरजमल ने हंसिया को उनके अद्भुत साहस और व्यक्तित्व के कारण चुना और उनके पिता रतीराम से विवाह की बात तय की।

हंसिया के पिता रतीराम की 84 खंबों वाली कचहरी, जहाँ महाराजा जयसिंह और उनके प्रशासनिक अधिकारी प्रजा की समस्याओं का समाधान करते और लगान वसूली करते थे, आज खंडहर बन चुकी है। ग्रामीण बताते हैं कि कचहरी में वर्षों से किसी भी अन्याय का मामला नहीं हुआ। महाराजा सूरजमल के समय में भी सत्य और न्याय की रक्षा के लिए पंच-पटेलों द्वारा फैसले किए जाते थे। इतिहास में उल्लेखनीय है कि एक असत्य सौगंध मामले में महाराजा सूरजमल ने न्याय और दया दोनों का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

सलेमपुर कलां की हवेली, जिसमें 1945 से बालिका विद्यालय संचालित था और 2015 में अन्य स्कूल में विलय के बाद आज महिला-बाल विकास विभाग का आंगनबाड़ी केंद्र रह गया, अब टूट-फूट और उपेक्षा की शिकार है। प्राचीन कोठरियां बंद हैं और परिसर का अधिकांश भाग खंडहर में बदल चुका है। ग्रामीण स्थानीय प्रशासन, सांसद और विधायक से कई बार संरक्षण की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

सलेमपुर कलां का इतिहास सत्य और न्याय के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। रतीराम और उनकी पुत्री हंसिया के जीवन और कार्य इस गांव की पहचान बनाते हैं। वर्तमान में हवेली और कचहरी की खंडहर स्थिति न केवल ऐतिहासिक धरोहर के नुकसान का संकेत है, बल्कि यह राज्य और केंद्र सरकार के संरक्षण प्रयासों की गंभीर कमी को भी उजागर करती है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि संरक्षण और मरम्मत के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो कुछ ही समय में यह प्राचीन धरोहर केवल टूट-फूटी दीवारों और नामों तक सीमित रह जाएगी।

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Mohan Joshi, Bharatpur

Mohan Joshi, Bharatpur

नाम: मोहन लाल जोशी

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: भरतपुर (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): तहसील रिपोर्टिंग, क्राइम (अपराध), एग्रीकल्चर फार्मिंग (कृषि), प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं जनसमस्याएं

परिचय एवं अनुभव 

मोहन लाल जोशी को मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में एक लंबा और विविध अनुभव है। वह वर्तमान में भरतपुर क्षेत्र से विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उनके करियर का विवरण निम्नलिखित है:

  • राजस्थान पत्रिका: इन्होंने 10 वर्षों तक राजस्थान पत्रिका में अपनी सेवाएं दी हैं, जहाँ मुख्य रूप से क्राइम, एग्रीकल्चर फार्मिंग और जन समस्याओं से संबंधित विषयों पर विस्तृत कवरेज की।
  • ईटीवी राजस्थान (जयपुर): 14 साल पहले इन्होंने ईटीवी राजस्थान, जयपुर के साथ काम किया।
  • शेर-ए-हिंदुस्तान: इस मीडिया संस्थान के साथ भी काम करने का अनुभव।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

मोहन लाल जोशी शैक्षणिक और तकनीकी रूप से पत्रकारिता में उच्च योग्यता रखते हैं:

  • स्नातक (Graduation)
  • बीजेएमसी (BJMC): बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन
  • पीएचडी (Ph.D.): पत्रकारिता (Journalism) में उनकी पीएचडी वर्तमान में जारी है।

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