केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में भीषण जल संकट, तड़प रहे कछुए-मछलियां और प्रवासी पक्षी विमुख
भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में भीषण जल संकट से कछुए-मछलियां तड़प रहे हैं और प्रवासी पक्षी विमुख हो रहे हैं। जानिए क्या है पूरी त्रासदी और इसके पीछे की असली वजह।

तस्वीर में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के सूखे और कीचड़युक्त तालाब के किनारे और पानी में कछुए दिखाई दे रहे हैं।
लोकेशन भरतपुर। रिपोर्ट मुकेश कुमार। भरतपुर, 25 जुलाई। विश्व धरोहर केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। पानी की भारी कमी के कारण बेबस और मृत पड़े कछुए और कम पानी में दम तोड़ती मछलियाँ यह हृदयविदारक दृश्य उद्यान प्रशासन, पर्यटकों, पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव प्रेमियों को गहरी चिंता में डाल रहा है। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीपक मुदगल ने इस त्रासदी को अपने कैमरे में कैद किया है। उनकी तस्वीरों में सूखे तालाबों के किनारे छटपटाते और मृत कछुए तथा जिंदगी की साँसों से जूझती मछलियाँ साफ दिख रही हैं। दीपक मुदगल ने बताया कि पानी न मिलने से उद्यान का पूरा इकोसिस्टम उजड़ रहा है। रोज मछलियाँ मर रही हैं और कछुए सूखी जमीन पर बेबस तड़प रहे हैं। यह सिर्फ वन्यजीवों की मौत नहीं, बल्कि एक पूरे वेटलैंड की चीख है। उन्होंने बताया कि पांचना बाँध से समय पर पानी न पहुँचने के कारण उद्यान के सभी ब्लॉक तेजी से सूख रहे हैं। जल स्तर इतना नीचे गिर गया है कि बचे हुए पानी में ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है, जिससे मछलियाँ बड़े पैमाने पर मर रही हैं। प्रशासन छोटे जलीय जीवों को दूसरे ब्लॉक में शिफ्ट करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है। उद्यान को हर वर्ष लगभग 550 एमसीएफटी पानी की आवश्यकता होती है, जो सामान्यतः जुलाई के दूसरे-तीसरे सप्ताह तक पांचना बाँध से पहुँच जाता है। इस बार निर्धारित पानी नहीं आया। वैकल्पिक रूप से चंबल नदी के पानी से कुछ आपूर्ति की गई, जो आवश्यकता के मुकाबले नगण्य है। इससे जलीय वनस्पति भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पा रही, जो पक्षियों का मुख्य भोजन है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि वर्तमान में पक्षियों का प्रजनन काल चल रहा है। यदि पानी की व्यवस्था में और देरी हुई तो राष्ट्रीय उद्यान को भारी नुकसान होगा तथा आने वाले हजारों पक्षियों का प्रजनन चक्र भी प्रभावित हो जाएगा। उद्यान में पाई जाने वाली लगभग 375 से अधिक पक्षी प्रजातियों पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। दीपक मुदगल ने आमजन से अपील की है कि वे इस संकट से बचने के लिए तत्काल एवं स्थायी समाधान की माँग प्रशासन और सरकार से करने में माध्यम बनें, ताकि इस खूबसूरत दुनिया को बचाया जा सके। उन्होंने माँग की है कि पांचना बाँध से तुरंत पानी छोड़ने की व्यवस्था की जाए। प्रतिवर्ष जून-जुलाई में कम से कम 550 एमसीएफटी पानी समय से छोड़ने का स्थायी प्रावधान सुनिश्चित किया जाए। उद्यान को पेयजल और सिंचाई से अलग प्राथमिकता देकर स्वतंत्र जल अधिकार दिया जाए। नए जल स्रोत विकसित किए जाएँ तथा जल संरक्षण की ठोस योजनाएँ लागू की जाएँ इसके साथ ही एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति गठित की जाए, जो पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता पर निरंतर नजर रखे। दीपक मुदगल ने कहा कि केवलादेव यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इसे बचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। राज्य सरकार, केंद्र सरकार और प्रशासन से विनम्र अपील है कि अब और देर न करें। समय बहुत कम है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इस प्रसिद्ध पक्षी स्वर्ग को बचाना कठिन हो जाएगा। इससे जुड़े नेचर गाइड, रिक्शा चालक, होटल व्यवसाय और शहर की आय पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा तथा प्रकृति की यह खूबसूरत दुनिया उजड़ती दिखाई देगी।

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