केवलादेव नेशनल पार्क में स्थित 350 साल पुराना शिव मंदिर, महाराजा सूरजमल ने कराया था निर्माण
भरतपुर के इस प्राचीन मंदिर से जुड़ी है गाय के दूध अभिषेक की अनोखी किवदंती, सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़।

भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क स्थित प्राचीन केवलादेव शिव मंदिर जहां महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क में स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर, घने पेड़ों के बीच स्थित है। यह मंदिर लगभग 350 वर्ष पुराना माना जाता है और इसे भरतपुर के राजा द्वारा बनवाया गया था। महाशिवरात्रि और सावन माह में यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से भगवान शिव से जो भी मांगता है उसकी मन्नत जरूर पूरी होती है। इस मंदिर को लेकर एक बहुत ही अनोखी किवदंती भी जुड़ी हुई है, जिसकी वजह से इस मंदिर के प्रति लोगों की आस्था और गहरी हो जाती है।
चमत्कारी इतिहास और किवदंती
मंदिर के पुजारी जगपाल नाथ योगी ने बताया कि:
"यह प्राचीन शिव मंदिर जो बना हुआ है, यहां पर पहले जंगल हुआ करता था। एक दिन पशुपालक की गाय जंगल में एक केले के पेड़ के नीचे जाकर दूध देने लग गई थी। उसके थनों से अपने आप दूध निकल रहा था।"
एक दिन एक पशु चराने वाले ने एक गाय का पीछा किया और स्वयं एक महत्वपूर्ण घटना देखी। उसने तुरंत भरतपुर के महाराजा सूरजमल को इस घटना की जानकारी दी।
महाराजा सूरजमल द्वारा मंदिर का निर्माण
- महाराजा सूरजमल ने उस स्थान पर खुदाई करवाई, जहां घटना हुई थी।
- खुदाई के दौरान, वहां से एक शिवलिंग प्राप्त हुआ।
- इस घटना के बाद, महाराजा सूरजमल ने उसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना करवाई और एक मंदिर का निर्माण कराया, जिसे केवलादेव शिव मंदिर कहा गया।
प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व
यह मंदिर केवलादेव नेशनल पार्क में प्रवेश करते ही लगभग चार से पांच किलोमीटर अंदर बना हुआ है। मंदिर के चारों ओर हरियाली और पक्षियों की चहल-पहल देखने को मिलती है। यहां महाशिवरात्रि एवं सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
मंदिर के पुजारी जगपाल नाथ योगी ने बताया कि:
"उनके परिवार के लोग कई पीढिय़ों से मंदिर में पूजा-पाठ कर रहे हैं। महाशिवरात्रि के दिन आसपास के गांव के लोग हरिद्वार, सोरोंजी आदि स्थानों से कावड़ लेकर मंदिर में गंगा जल चढ़ाने आते हैं। आज भी महाशिवरात्रि के दिन लोग यहां शिवलिंग पर जल चढ़ाने आते हैं। मान्यता है कि कोई भी व्यक्ति इस मंदिर में आकर सच्चे मन से जो भी मांगता है, महादेव उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।"
संरक्षण और विकास की दरकार
पुजारी जगपाल नाथ ने बताया कि मंदिर करीब 350 वर्ष पुराना है, लेकिन मंदिर की देखभाल के लिए न तो देवस्थान विभाग कोई फंड देता है और न ही अन्य किसी संस्था से कोई सहायता मिलती है। मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से ही पूजा-पाठ और रखरखाव का कार्य कराया जाता है। ऐसे में इस प्राचीन मंदिर के रखरखाव और संरक्षण की आवश्यकता है। सीएम भजनलाल शर्मा भरतपुर से ही है और उन्हें उम्मीद है कि अपने कार्यकाल में मंदिर के विकास को लेकर के जरूर सौगात देंगे।

Pratahkal Bureau
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