बयाना - झील केला देवी मेले से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां देवस्थान विभाग की कथित मनमानी और लापरवाही को लेकर दुकानदारों और आम श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। बताया जा रहा है कि इस बार मेले में दुकान माफियाओं को एक साथ ही दुकानों का वितरण कर दिया गया जिससे दुकान माफिया अपनी रेटों के अनुसार दुकानों के लिए दुकानदारों से अत्यधिक शुल्क वसूला गया है। इसके चलते कई वर्षों से लगातार दुकान लगाने वाले व्यापारियों ने इस बार मेले से दूरी बना ली है। महंगे रेट के कारण मेला ग्राउंड में कई स्थान खाली पड़े हैं, जिससे मेले की रौनक भी फीकी नजर आ रही है।

दुकानदारों का आरोप और आर्थिक बोझ

दुकानदारों का आरोप है कि "विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना के किराया बढ़ा दिया, जिससे छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।" यही मुख्य कारण है कि इस बार मेले का स्वरूप पहले जैसा नजर नहीं आ रहा है। पुराने और अनुभवी दुकानदारों के न आने से स्थानीय व्यापार पर भी इसका गहरा असर पड़ा है।

श्रद्धालुओं की परेशानी और सुविधाओं का अभाव

वहीं श्रद्धालुओं का कहना है कि "कम दुकानों के कारण उन्हें आवश्यक सामान और सुविधाएं भी आसानी से नहीं मिल पा रही हैं। जैसे कि मेले में अबकी बार एक भी खाने का होटल नहीं खोला गया है।" इसके अतिरिक्त, विभाग की ओर से मेले में आने वाले यात्रियों को पानी की कोई भी व्यवस्था नहीं की गई है। जिससे यात्री भूखे-प्यासे मेले में भटकने को मजबूर नजर आ रहे हैं और विभाग की उदासीनता स्पष्ट दिखाई दे रही है।

प्रशासन से समाधान की मांग

फिलहाल, इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की जा रही है। अब देखना होगा कि देवस्थान विभाग इस पर क्या कदम उठाता है और क्या मेले की व्यवस्थाओं में सुधार कर श्रद्धालुओं को राहत प्रदान की जाती है।

Pratahkal Bureau

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