भुसावर। बांण गंगा नदी से निकली अमर शहीद रमेश स्वामी कैनाल अपनी पहचान और उद्देश्य दोनों से दूर होती जा रही है। राजस्थान सरकार ने शहीद रमेश स्वामी की स्मृति को अमर रखने और क्षेत्र की कृषि सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस नहर का निर्माण कराया था, लेकिन विभागीय उपेक्षा और लगातार बढ़ते अतिक्रमण ने इसकी मूल रूपरेखा को ही खत्म कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार यह नहर गांव ऊलू के पास बांण गंगा नदी से निकलकर सलेमपुर खुर्द होते हुए मूडिया बांध तक पहुंचती है। निर्माण के समय नहर की दोनों ओर चौड़ी पटरियां बनी थीं जिन पर दो वाहन आसानी से क्रॉस हो सकते थे। आज स्थिति यह है कि पटरियों पर एक बड़ा वाहन भी निकलना मुश्किल हो गया है। आसपास के खेत मालिकों ने नहर की पटरियों को काटकर अपनी जमीन में मिला लिया है और कई स्थानों पर नहर को अवरुद्ध कर खेती की जा रही है।

अतिक्रमण के साथ ही नहर के किनारे उगी वन विभाग की वन संपदा भी लगातार निशाने पर है। लोग मौका पाकर हरे पेड़ों को काट रहे हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो रही है। पेड़ों की निरंतर कटाई से क्षेत्रीय पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

सिंचाई विभाग की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह कैनाल वर्षों से बदहाल अवस्था में पड़ी है। सरकार की ओर से नहर की सफाई के लिए टेंडर जारी किए जाने के बावजूद जमीन पर कोई कार्य दिखाई नहीं दे रहा। जब इस संबंध में सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मधुर गोयल से बात की गई तो उन्होंने माना कि सफाई का टेंडर हो चुका है, लेकिन यह कार्य क्षेत्र उनके अधीन नहीं आता।

अमर शहीद के नाम पर बनी यह कैनाल, अतिक्रमण, अवैध कटाई और विभागीय उदासीनता के चलते धीरे-धीरे अपनी पहचान खोती जा रही है। यदि समय रहते प्रशासन ने प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था और कृषि उत्पादन पर गहरा असर पड़ना तय है।

Pratahkal Bureau

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