भुसावर। अरावली पर्वतमालाओं की हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य इन दिनों अवैध खनन की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं। भुसावर उपखंड के अंतर्गत आने वाले गांवों में सरकारी अनुमति के बिना क्रेशर मालिकों द्वारा खुलेआम खनन कार्य किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन की अनदेखी और मिलीभगत के कारण यह गैरकानूनी खनन एक संगठित गोरखधंधे का रूप ले चुका है।

जानकारी के अनुसार, भुसावर उपखंड में 23 क्रेशरों में से केवल कुछ ही ऐसे हैं जो सरकारी नियमों के तहत संचालित हो रहे हैं, जबकि अधिकांश क्रेशर बिना भूमि कन्वर्जन और वैध अनुमति के कार्यरत हैं। प्रशासनिक शिथिलता के चलते इन क्रेशरों से न केवल सरकार को भारी राजस्व हानि हो रही है, बल्कि क्षेत्र की पर्वतमालाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती जा रही हैं।

गांव करवान, कोटकी, घाटरी और मनसापुरा क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि घाटरी के पास स्थित पर्वतमालाओं में लंबे समय से बिना लीज और कन्वर्जन के खनन जारी है। कुछ क्रेशर मालिकों को जहां महज तीन बीघा भूमि पर संचालन की अनुमति है, वहीं वे बीस बीघा से अधिक क्षेत्र में कब्जा कर पत्थर खनन कर रहे हैं। वर्षों बीत जाने के बाद भी इन क्रेशर संचालकों ने कन्वर्जन प्रक्रिया पूरी नहीं की है, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन और खान विभाग को कई बार अवैध खनन की शिकायतें और ज्ञापन सौंपे गए, मगर कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। वैर विधायक बहादुर सिंह कोली के क्षेत्र में हो रहे इस अवैध खनन की ओर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। क्रेशरों से उड़ने वाली धूल ने आसपास के गांवों का वातावरण प्रदूषित कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर जोन में पानी का छिड़काव नहीं किया जाता, जिससे हवा में धूल का गुबार छा जाता है और लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है। कई गांवों में सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारी के मरीज मिलने लगे हैं। धूल के महीन कण ग्रामीणों के घरों में तक पहुंच रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है।

इस संदर्भ में जब उपखंड अधिकारी राधेश्याम मीणा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कन्वर्जन और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर शीघ्र ही बैठक बुलाई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अरावली की गोद में पनप रहा यह अवैध खनन न केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन है, बल्कि यह वन्य जीव-जंतुओं के अस्तित्व और स्थानीय जनजीवन दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। यदि प्रशासन ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो भुसावर की यह पर्वतमाला जल्द ही बंजर पत्थरों के ढेर में बदल सकती है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story