भरतपुर। अरावली पर्वतमाला की गोद में बसे भरतपुर जिले के भुसावर क्षेत्र की पहाड़ियां दिन-प्रतिदिन उजड़ती जा रही हैं। हरियाली गायब हो रही है और रात के अंधेरे में पहाड़ों का सीना बमों से छलनी किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां दिन में खनन बंद दिखाई देता है, वहीं रात ढलते ही अवैध खनन माफिया खुलेआम विस्फोटक सामग्री से पहाड़ों को काट डालते हैं। प्रशासन, वन विभाग और खनिज विभाग की संयुक्त कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सिमटकर रह गई है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश और भय दोनों गहराते जा रहे हैं।

भुसावर, वैर, घाटरी, मंसापुरा, जसवर, सुहारी, खोहरा, महाराजपुरा और आसपास के गांवों में पहाड़ियों की खुदाई लगातार जारी है। अवैध खनन से निकलने वाले डंपर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रात में सड़कों पर फर्राटा भरती नजर आती हैं, जबकि दिन के समय यह गतिविधि पूरी तरह थम जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब संबंधित विभागों की मिलीभगत से हो रहा है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि क्रेशर जोन में विस्फोट के कारण न केवल उनके घरों में दरारें पड़ रही हैं बल्कि धूल के गुबार से फसलें भी बर्बाद हो रही हैं। खेतों की पैदावार पर असर पड़ रहा है और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। रात्रि के समय होने वाले विस्फोटों की आवाज से ग्रामीणों की नींद उड़ जाती है और भय का माहौल कायम है। कई बार ग्रामीणों ने प्रशासन को लिखित शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल तीन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को पकड़ने की औपचारिकता निभाई गई।

गांव के निवासी चंदन, रोहित, फतेहसिंह, प्रदीप और रमेश ने बताया कि रात में पहाड़ों पर होने वाले धमाकों से पत्थर उछलकर घरों पर गिरते हैं। कई बार हादसे होते-होते टल चुके हैं, लेकिन अब स्थिति विस्फोटक होती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अवैध खनन पर रोक नहीं लगी तो न केवल पर्यावरण का संतुलन बिगड़ेगा बल्कि मानव जीवन भी संकट में पड़ जाएगा।

इस संबंध में जब वन विभाग के नदबई रेंजर राजेश शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अवैध खनन के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। शीघ्र ही खनन माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और जो भी अधिकारी या कर्मचारी अभियान में बाधा डालेगा, उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

अरावली की पहाड़ियों का यह निरंतर क्षरण न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गंभीर चेतावनी है। प्रशासन की लापरवाही और मिलीभगत से यह गैरकानूनी कारोबार लगातार फल-फूल रहा है। अगर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो भरतपुर की हरी-भरी पहाड़ियां जल्द ही केवल धूल और पत्थरों के ढेर में तब्दील हो जाएंगी।

Pratahkal Bureau

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