भुसावर। भुसावर क्षेत्र की पर्वतमालाओं में अवैध खनन माफियाओं का बेधड़क धंधा लगातार जारी है। वन विभाग और खनिज विभाग की कथित अनदेखी के चलते खनन कार्य दिन-रात निर्बाध रूप से हो रहा है। स्थानीय निवासियों और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन की कार्यवाही न के बराबर होने से माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

भुसावर की पर्वतमालाएं कभी हरे-भरे पेड़ों और जीव-जंतुओं की खान थीं, लेकिन पिछले कई वर्षों में लगातार अवैध खनन और पेड़ों की कटाई से ये क्षेत्र अब वीरान और उजाड़ नजर आने लगा है। खासकर कारवान, घाटरी, सीता नाका, गोठरा, निठार और मायदपुर क्षेत्रों में अवैध खनन विकराल रूप ले चुका है। इन क्षेत्रों में भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि आसपास के लोगों के जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। धूल-धक्कड़ और प्रदूषण से स्थानीय लोग सांस लेने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन माफियाओं का प्रशासनिक अधिकारियों से गुप्त संबंध होने के कारण कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। बार-बार शिकायतों के बावजूद वन और खनिज विभाग की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

खनन विभाग के अधिकारी वीरेंद्र सिंह का कहना है कि "विलियम्स की टीम एक्टिव मोड में है," जबकि भुसावर उपखंड अधिकारी ने बताया कि तीनों संबंधित विभागों से जवाब मांगा गया है। इसके बावजूद विजिलेंस टीम के क्षेत्र में सक्रिय होने के बावजूद वास्तविक कार्यवाही न के बराबर दिखाई दे रही है।

विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो न केवल पर्वतमालाओं का प्राकृतिक सौंदर्य और वन संपदा खतरे में है, बल्कि वन्य जीवों का जीवन भी संकट में पड़ सकता है।

Pratahkal Bureau

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